ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
पृष्ठ 688, कुल 737 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 688
( ३०६ ) शंकुप्राच्यपरांतरं शंकुवर्गाद्वधमुदयांतरं याम्ये । लब्धगुणं यष्टिगुणं क्रांति ज्यातो रविः प्राग्वत् ॥ २८ ॥ अपसृतिरन्यशलाका गुणशलाक्षांतरेण भक्ता भूः । भू स्वशलाका गुणिता गुणिताद्रष्टि विभक्ता ॥ २६ ॥
२८. (घ) १. हृतं (ग) for (गुणं)
(ग) २. प्राच्या for (प्राच्य) (वि०—इसकी श्लोक संख्या ३१ है)
३. मुदगंतरं यामे for (मुदयांतरं याम्ये)
(च) १. हृतं (ङ) for (गुणं)
(ङ) ३. मुदगंतरं for (मुदयांतरं)
४. लम्बगुणं for (लब्धगुणं)
२६. (घ) १. शलाक्ष्यंतरेण (ग) शलाकांतरेण (ङ) for (शलाक्षांतरेण)
२. 'गुणिता' लुप्त
३. दृष्टि (ग) द्रिष्टि for (द्रष्टि)
(वि०—इसकी क्रमसंख्या ३० है)
(ङ) ६. भूः for (भू)
३. ४. यष्टि विभक्ता गृहाद्यौच्चम् for (गुणिता द्रष्टि विभक्ता)
(ग) (वि०—इसकी श्लोकसंख्या ३२ है)
४. 'गृहाद्योच्यम्' पंक्ति का अंतिम शब्द । ३. दृष्टि for (द्रष्टि)
५. (वि०—इसकी क्रमसंख्या ३० अंकित है)
४. + 'गृहाद्योच्चं' यह पद पृष्ठ के नीचे अन्य हाथ से लिखा हुआ है ।
दृष्ट्या गुणितापसृति दृष्टि विशेषभाजिता भूमिः ।
भूमिस्व द्रिष्टिभक्ता शलाकाया संगुणोच्छ्रायम् ॥ ३३ ॥
(च) यह अतिरिक्त श्लोक यहां पृष्ठ के निम्नोपांत पर अन्यहस्तसे लिखा हुआ है ।
१. र्दृष्टि for (दृष्टि) २. भूः for (भूमिः)
३. द्रष्टि for (द्रिष्टि)
४. शलाकया (ङ) for (शलाकाया)
५. संगुणोद्धाय (ङ) for (संगुणोच्छ्रायम्)
(वि०—इसकी भी क्रमसंख्या ३० अंकित है)
(ङ) १. र्दृष्टि विशेषेण