ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३१२ ) एवं वफवरं नाडिकांगुलैः संस्थितेऽन्तरे योज्यम् । युद्धानि मल्लगज महिषमेष विविधायुधनुतां च ॥ ४६ ॥ निगिरति च घटिकां गुलांकितै गंडिकै मंयुरोऽर्ही । वीर्यांभ्रू मेवं गुडकैरूपरिस्थै ब्रह्मचर्याद्यैः ॥ ४७ ॥ कालोक्षपाप्तिहितः पटहः शब्दकरोति घंटा वा । एवं यन्त्र सहस्राण्यनेन बीजेन कार्याणि ॥ ४८ ॥ ४६. (घ) १. वधूवरं (ग) (ङ) for (वफवरं) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ४७ है ।) (ग) २. संयुतं for (संस्थिते) ३. चरे (वरे) for (ऽन्तरे) ४. विवधायुधभृतां च ॥५०॥ (ङ) for (विविधायुधनुतां च) (वि०— इसकी श्लोक संख्या ५० है) (च) १. एवं च वरं for (एवं वफवरं) ४. विविधाधुधभृतां च for (विविधायुधनुतां च) (वि०—श्लोक संख्या ४७ है) (छ) २. संयुता for (संस्थिते) ३. वरे योज्या for (ऽन्तरे योज्यम्) ४७. (घ) (वि०— इसकी क्रमसंख्या ४८ है) १. निगिरति गिरति च (ग) निगिरति गिरति for (निगिरति) २. गंडकैर्मयूरोऽहिम् (ग) खंडकै for (गंडिकै) ३. वीर्यामिवं (ग) for (वीर्यांभ्रू मेवं) ४. ब्रह्मचर्याद्यैः (ग) ब्रह्मचार्याद्यैः ॥५१॥ (ङ) for (ब्रह्मचर्याद्यैः) (ग) ५. गुलांकितैः for (गुलांकितै) ६. मयूरोहिम् for (मंयुरोऽहीम्) (वि०—इस की श्लोक संख्या ५१ है) (च) २. गंडकै for (गंडिकै) ६. मयूरोऽर्हि for (मंयुरोऽर्ही) ३. वीर्यामिवं for (वीर्यांभुमेवं) ४. ब्रह्मचर्याद्यैः for (ब्रह्मचर्याद्यैः) (वि०—श्लोक संख्या ४८ है) (ङ) २. खण्डकैर for (गंडिकै) ६. मयूरोऽर्हिम् for (मंयुरोऽर्ही) ३. चीर्यामिव for (वीर्यांभ्रू मेवं) ४८. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ४६ है) १. कालोक्षपाप्तिहितः (ग) कीलीतक्षेपाभिहतः for (कालोक्षपाप्तिहतः) २. यंत्रसहस्राण्यनेन (च) (ग) for (यंत्र सहस्राण्यनेन) ३. शब्दं (च) (ङ) for (शब्द) ४. 'वा' पद लुप्त है (वि०—इसकी श्लोकसंख्या ५२ है) (च) १. कालोक्षेपाभिहतः for (कालोक्षपाप्तिहितः) (वि०—इसकी श्लोकसंख्या ४६ है) (ङ) १. कीलोत्क्षेपाभिहतः for (कालोक्षपाप्तिहितः)