ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( ३१३ ) लघुदारूमयं^१ चक्रं^५ सम^६शुषिरांतरं^२ पृथगराणाम् । अर्धं^७ पारदपूर्णां^३ मध्ये^८ सुल्लिष्ट^४ कृतसंध्यौ^१ ॥ ४६ ॥ तिर्यक् कीलोमध्येध्व्याधारस्थो^१ स्य^२पारदे^५ ब्रजति^६ । छिद्रान्यद्वै^३ चक्रकर्मजंभ्रमे^७ ^४ वांबरे^८ भ्रमति^५ ॥ ५० ॥
४६. (घ) (वि० — इसकी क्रमसंख्या ५० है)
१. लघुदारमयं for (लघुदारूमयं)
२. शुषिरांतरां for (शुषिरांतरं)
३. पारतंपूर्णं (ग) परेतपूर्णं for (पारदपूर्णां)
४. सुश्लिष्ट (ग) संश्लिष्ट for (सुल्लिष्ट)
(ग) ५. चत्र for (चक्र)
६. दाम for (सम) ७. अर्द्धं for (अर्धं)
८. परिधौ for (मध्ये) १. कृतं