ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)
Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press
महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें९२ वेदान्त-दर्शन [ पाद ४ इस शङ्काका निवारण पहले ( १ । १ । ३१ सूत्रमें ) कर दिया गया है। वहाँ यह बता दिया गया है कि ब्रह्म सभी धर्मोंका आश्रय है, अतः जीव तथा प्राण- के धर्मोंका उसमें बताया जाना अनुचित नहीं है। यदि जीव आदिको भी ज्ञेय तत्त्व मान लें तो त्रिविध उपासनाका प्रसङ्ग उपस्थित हो सकता है, जो उचित नहीं है। सम्बन्ध-अब सूत्रकार इस विषयमें आचार्य जैमिनिकी सम्मति क्या है, यह बताते हैं— अन्यार्थं तु जैमिनिः प्रश्नव्याख्यानाभ्यामपि चैवमेके ॥ १ । ४ । १८ ॥ जैमिनिः=आचार्य जैमिनि; तु=तो ( कहते हैं कि ); अन्यार्थम्=( इस प्रकरणमे ) जीवात्मा तथा मुख्यप्राणका वर्णन दूसरे ही प्रयोजनसे है; प्रश्न- व्याख्यानाभ्याम्=क्योंकि प्रश्न और उत्तरसे यही सिद्ध होता है; च=तथा; एके= एक ( काण्व ) शाखावाले; एवम् अपि=ऐसा कहते भी हैं। व्याख्या-आचार्य जैमिनि पूर्व कथनका निराकरण करते हुए कहते हैं कि इस प्रकरणमें जो जीवात्मा और मुख्यप्राणका वर्णन आया है, वह मुख्यप्राण या जीवात्माको जगत्का कारण बतानेके लिये नहीं आया है, जिससे कि ब्रह्मको समस्त लक्षणोंका आश्रय बताकर उत्तर देनेकी आवश्यकता पड़े। यहाँ तो उनका वर्णन दूसरे ही प्रयोजनसे आया है। अर्थात् उनका ब्रह्ममे विलीन होना बताकर ब्रह्मको ही जगत्का कारण सिद्ध करनेके लिये उनका वर्णन है। भाव यह है कि जीवात्माकी सुषुप्ति-अवस्थाके वर्णनद्वारा सुषुप्तिके दृष्टान्तसे प्रलयकालमे सबका ब्रह्ममें ही विलय और सृष्टिकालमे पुनः उसीसे प्राकट्य बताकर ब्रह्मको ही जगत्- का कारण सिद्ध किया गया है। यह बात प्रश्न और उसके उत्तरमे कहे हुए वचनोंसे सिद्ध होती है। इसके सिवा, काण्वशाखावालोंने तो अपने ग्रन्थ- में इस विषयको और भी स्पष्ट कर दिया है। वहाँ अजातशत्रुने कहा है कि ‘यत्रैष एतत्सुप्तोऽभूद् य एष विज्ञानमयः पुरुषस्तदेषां प्राणानां विज्ञानेन विज्ञानमादाय य एषोऽन्तर्हृदय आकाशस्तस्मिञ्छेते तानि यदा गृह्णात्यथ हैतत्पुरुषः स्वपिति नाम ।’ ( बृह० उ० २ । १ । १७ ) अर्थात् ‘यह विज्ञानमय पुरुष ( जीवात्मा ) जब सुषुप्ति-अवस्था में स्थित था ( सोता था ), तब यह बुद्धिके सहित समस्त प्राणोंको अर्थात् मुख्यप्राण और समस्त इन्द्रियोंकी वृत्तिको लेकर उस आकाशमें सो रहा