ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)
Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press
महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 12, कुल 417 में से
संदर्भ में पढ़ें( १२ ) सूत्र विषय पृष्ठ २४-२८ श्रुतिमे 'वैश्वानर' नाम ब्रह्मके लिये ही आया है, इसका युक्तियुक्त विवेचन ... ... ३९-४४ २९-३२ सर्वव्यापी परमात्माको देशविशेषसे सम्बद्ध बतानेका रहस्य ... ४४-४६ तीसरा पाद १-७ द्युलोक और पृथ्वी आदिका आधार ब्रह्म ही है, जीवात्मा अथवा प्रकृति नहीं, इसका प्रतिपादन ... ... ४७-५० ८-९ ब्रह्म ही भूमा है—इसका उपपादन ... ... ५१-५३ १०-१२ श्रुतिमे ब्रह्मको 'अक्षर' कहा गया है, इसका युक्तियुक्त समर्थन ५३-५५ १३ 'ॐ' इस अक्षरके द्वारा ध्येय तत्त्व भी ब्रह्म ही है, इसका निरूपण ५५ १४-२३ दहराकाशकी ब्रह्मरूपताका प्रतिपादन ... ... ५६-६२ २४-२५ अङ्गुष्ठमात्र पुरुषकी परब्रह्मरूपता और उसे हृदयमे स्थित बतानेका रहस्य ... ... ६२-६३ २६-३० ब्रह्मविद्यामे मनुष्योके सिवा देवताओके भी अधिकारका प्रतिपादन और इसमे सम्भावित विरोधका परिहार ... ६३-६७ ३१-३३ यज्ञादि कर्म तथा ब्रह्मविद्यामें देवताओके अधिकारका जैमिनि- द्वारा विरोध और बादरायणद्वारा उसका परिहार ... ६७-६९ ३४-३८ वेदविद्यामें शूद्रके अनधिकारका कथन ... ... ६९-७३ ३९ अङ्गुष्ठमात्र पुरुषके ब्रह्मरूप होनेमें दूसरी युक्ति ... ७४ ४०-४३ 'ज्योति' तथा 'आकाश' भी ब्रह्मके ही वाचक हैं, इसका समर्थन ... ... ७५-७७ चौथा पाद १-२ सांख्योक्त प्रकृतिकी अवैदिकताके प्रसङ्गमे 'अव्यक्त' शब्दपर विचार और उसके शरीरवाचक होनेका कथन ... ७८-७९ ३-५ वेदोक्त प्रकृति स्वतन्त्र और ज्ञेय नहीं, परमेश्वरके अधीन रहनेवाली उसीकी शक्ति है, इसका प्रतिपादन ... ८०-८२ ६-७ 'अव्यक्त' शब्द प्रकृतिसे भिन्न अर्थका वाचक क्यों है ? इसका युक्तिपूर्ण विवेचन ... ... ८२-८३ ८-१० श्रुतिमे 'अजा' शब्द परब्रह्मकी शक्तिविशेषका बोधक है, सांख्योक्त प्रधानका नहीं, इसका प्रतिपादन ... ८४-८६ ११-१३ 'पञ्च-पञ्चजनाः' शब्दसे सांख्योक्त प्रकृतिके पचीस तत्त्वोंका श्रुतिमे वर्णन किया गया है, इस मान्यताका खण्डन ... ८६-८८