भारतकोश
ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press

महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished417 पृष्ठ

पृष्ठ 14, कुल 417 में से

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( १४ ) सूत्र विषय पृष्ठ० ४२-४५ पाञ्चरात्र आगममें उठायी हुई आंशिक अनुपपत्तियोंका परिहार १५७-१६० तीसरा पाद १-९ ब्रह्मसे आकाश और वायुकी उत्पत्तिका उपपादन करके ब्रह्मके सिवा, सबकी उत्पत्ति-शीलताका कथन ... १६१-१६५ १०-१३ वायुसे तेजकी, तेजसे जलकी और जलसे पृथिवीकी उत्पत्तिमे भी ब्रह्म ही कारण है, इसका प्रतिपादन ... १६५-१६७ १४-१५ सृष्टिक्रमके विपरीत प्रलयक्रमका कथन तथा इन्द्रियोंकी उत्पत्तिमें क्रमविशेषका अभाव ... ... १६७-१६९ १६-२० जीवके जन्म-मृत्यु-वर्णनकी औपचारिकता तथा जीवात्माकी नित्यता ... ... ... १७०-१७३ २१-२९ जीवात्माके अणुत्वका खण्डन और विभुत्वका स्थापन ... १७३-१७८ ३०-३२ जीव शरीरके सम्बन्धसे एकदेशी है, सत् जीवात्माका ही सृष्टि- कालमें प्राकट्य होता है और वह अन्तःकरणके सम्बन्धसे विषयोंका अनुभव करता है; इसका प्रतिपादन ... १७८-१८१ ३३-४२ जीवात्माका कर्त्तापन शरीर और इन्द्रियोंके सम्बन्धसे औप- चारिक है तथा उसमे परमात्मा ही कारण हैं; क्योंकि वह उन्हींके अधीन है, इसका निरूपण ... ... १८२-१८८ ४३-४७ जीवात्मा ईश्वरका अंग है, किंतु ईश्वर उसके दोषोंसे लिप्त नहीं होता; इसका प्रतिपादन ... ... १८९-१९३ ४८-५० नित्य एवं विभु जीवोंके लिये देहसम्बन्धसे विधि-निषेधकी सार्थकता और उनके कर्मोंका विभाग ... ... १९३-१९४ ५१-५३ जीव और ब्रह्मके अंशांशिभावको औपाधिक माननेमे सम्भावित दोषोंका उल्लेख ... ... १९५-१९६ चौथा पाद १-४ इन्द्रियोंकी उत्पत्ति भूतोंसे नहीं परमात्मासे ही होती है, इसका प्रतिपादन और श्रुतियोंके विरोधका परिहार ... १९७-१९९ ५-७ इन्द्रियोंकी संख्या सात ही है, इस मान्यताके खण्डनपूर्वक मन- सहित ग्यारह इन्द्रियोंकी सिद्धि तथा सूक्ष्मभूतोंकी भी ब्रह्मसे उत्पत्तिका कथन ... ... ... १९९-२०१ ८-१३ मुख्य प्राणको ब्रह्मसे ही उत्पत्ति बताकर उसके स्वरूपका निरूपण ... ... ... २०१-२०४ १४-१६ ज्योतिः आदि तत्त्वोंका अधिष्ठाता ब्रह्म और शरीरका अधिष्ठाता नित्य जीवात्मा है, इसका कथन ... २०४-२०५

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