भारतकोश
ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press

महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished417 पृष्ठ

पृष्ठ 18, कुल 417 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 18

( १८ ) सूत्र विषय पृष्ठ १८-२० पूर्वपक्षके खण्डनपूर्वक संन्यास-आश्रमकी सिद्धि ... ३१०-३१२ २१-२२ अपूर्व फलदायिनी उद्गीथ आदि उपासनाओंका विधान ... ३१३-३१४ २३-२४ { उपनिषद्वर्णित कथाएँ विद्याका ही अङ्ग हैं, यज्ञका नहीं; इसका प्रतिपादन ... ... ३१४-३१५ २५ ब्रह्मविद्यारूप यज्ञमें अग्नि ईंधन आदिकी अपेक्षाका अभाव ३१५-३१६ २६-२७ { विद्याकी प्राप्तिके लिये वर्णाश्रमोचित कर्मोंकी अपेक्षा तथा शम-दम आदिकी अनिवार्य आवश्यकता ... ३१६-३१८ २८-३१ { प्राणसङ्कटके सिवा अन्य समयमें आहार-शुद्धिविषयक सदाचारके त्यागका निषेध ... ... ३१८-३२० ३२-३३ ज्ञानीके लिये लोकसंग्रहार्थ आश्रमकर्मके अनुष्ठानकी आवश्यकता ३२१ ३४-३९ { भक्तिसम्बन्धी श्रवण-कीर्तन आदि कर्मोंके अनुष्ठानकी अनिवार्य आवश्यकता तथा भागवतधर्मकी महत्ताका प्रतिपादन ... ३२१-३२७ ४०-४३ { वानप्रस्थ, संन्यास आदि ऊँचे आश्रमोंसे वापस लौटनेका निषेध, लौटनेवालेका पतन और ब्रह्मविद्या आदिमें अनधिकार ... ३२७-३२९ ४४-४६ { उद्गीथ आदिमे की जानेवाली उपासनाका कर्ता तो ऋत्विक् है किंतु उसके फलमें यजमानका अधिकार है, इसका वर्णन ३२९-३३० ४७-५० संन्यास, गृहस्थ आदि सब आश्रमोंमें ब्रह्मविद्याका अधिकार ३३१-३३४ ५१-५२ { मुक्तिरूप फल इस जन्ममें मिलता है या जन्मान्तरमें, इसी लोक- मे मिलता है, या लोकान्तरमे ? इसका नियम नहीं है यह कथन ३३४-३३५ चौथा अध्याय पहला पाद १-२ { उपदेश-ग्रहणके पश्चात् ब्रह्मविद्याके निरन्तर अभ्यासकी आवश्यकता ... ... ... ३३६-३३७ ३ आत्मभावसे परब्रह्मके चिन्तनका उपदेश ... ३३७-३३८ ४-५ प्रतीकमे आत्मभावनाका निषेध और ब्रह्मभावनाका विधान ... ३३८-३३९ ६ उद्गीथ आदिमे आदित्य आदिकी भावना ... ३३९ ७-१० आसनपर बैठकर उपासना करनेका विधान ... ३४०-३४१ ११ जहाँ चित्त एकाग्र हो, वही स्थान उपासनाके लिये उत्तम ३४१-३४२ १२ आजीवन उपासनाकी विधि ... ३४२-३४३ १३-१४ { ब्रह्मसाक्षात्कारके पश्चात् ज्ञानीका भूत और भावी शुभाशुभ कर्मोंसे असम्बन्ध ... ... ... ३४३-३४४ १५ शरीरके हेतुभूतप्रारब्ध कर्मका भोगके लिये नियत समयतक रहना ३४५

ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित) · पृष्ठ 18, कुल 417 में से · BharatKosha