भारतकोश
ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press

महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished417 पृष्ठ

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( १९ ) सूत्र विषय पृष्ठ १६-१७ ज्ञानीके लिये अग्निहोत्र आदि तथा अन्य विहित कर्मोंका लोकसंग्रहार्थ विधान ... ... ३४५-३४६ १८ कर्माङ्ग उपासनाका ही कर्मके साथ समुच्चय ... ३४७ १९ प्रारब्धका भोगसे नाश होनेपर ज्ञानीको ब्रह्मकी प्राप्ति ... ३४७ दूसरा पाद १-४ उत्क्रमणकालमे वाणीकी अन्य इन्द्रियोंके साथ मनमे, मनकी प्राणमे और प्राणकी जीवात्मामें स्थितिका कथन ... ३४८-३४९ ५-६ जीवात्माकी सूक्ष्मभूतोंमें स्थिति ... ... ३५०-३५१ ७ ब्रह्मलोकका मार्ग आरम्भ होनेसे पूर्वतक ज्ञानी और अज्ञानी- की समान गतिका प्रतिपादन ... ... ३५१ ८ अज्ञानी जीवका परब्रह्ममे स्थित रहना प्रलयकालकी भाँति है ... ३५१-३५२ ९-११ जीवात्मा उत्क्रमणके समय जिस आकाश आदि भूतसमुदाय- मे स्थित होता है, वह सूक्ष्मशरीर है, इसका प्रतिपादन ... ३५२-३५३ १२-१६ निष्काम ज्ञानी महात्माओंका ब्रह्मलोकमे गमन नहीं होता, वे यहीं परमात्माको प्राप्त हो जाते है, इसका निरूपण ... ३५४-३५६ १७ सूक्ष्मशरीरमें स्थित जीव किस प्रकार ब्रह्मलोकमे जानेके लिये सुषुम्ना नाडीद्वारा शरीरसे निकलता है, इसका वर्णन ... ३५७-३५८ १८ शरीरसे निकलकर जीवात्माका सूर्य-रश्मियोंमे स्थित होना ३५८ १९-२० रात्रि और दक्षिणायनकालमे भी सूर्यरश्मियोंसे उसका बाधारहित सम्बन्ध ... ... ३५८-३६० २१ योगीके लिये गीतोक्त कालविशेषका नियम ३६० तीसरा पाद १ ब्रह्मलोकमे जानेके लिये 'अर्चिरादि' एक ही मार्गका कथन ३६१-३६२ २ संवत्सरमे ऊपर और सूर्यलोकके नीचे वायुलोककी स्थिति ३६२-३६३ ३ 'विद्युत्' से ऊपर वरुणलोककी स्थिति ... ३६३ ४ 'अर्चिः', 'अहः', 'पक्ष', 'मास', 'अयन' आदि आतिवाहिक पुरुष हैं, इसका प्रतिपादन ... ... ३६३-३६४ ५ अर्चि आदिको अचेतन माननेमे आपत्ति ... ३६४ ६ विद्युत्लोकसे ऊपर ब्रह्मलोकतक अमानव पुरुषके साथ जीवात्माका गमन ... ... ३६४-३६५ ७-११ 'ब्रह्मलोकमे कार्यब्रह्मकी प्राप्ति होती है', इस बादरिके मतका वर्णन ... ... ३६५-३६७ १२-१४ 'ब्रह्मलोकमे परब्रह्मकी प्राप्ति होती है' इस जैमिनिमतका उपपादन ... ... ३६७-३६९