भारतकोश
ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press

महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished417 पृष्ठ

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२०० वेदान्त-दर्शन [ पाद ४ ऐसा कहकर इन्द्रियोका 'सात' यह विशेषण दिया है। इससे यही सिद्ध होता है कि इन्द्रियाँ सात ही हैं। सम्बन्ध—अब सिद्धान्तीकी ओरसे उत्तर दिया जाता है— हस्तादयस्तु स्थितेऽतो नैवम् ॥ २ । ४ । ६ ॥ तु=किन्तु; हस्तादयः=हाथ आदि अन्य इन्द्रियाँ भी हैं; अतः=इसलिये; स्थिते=इस स्थितिमे; एवम्=ऐसा; न=नही (कहना चाहिये कि इन्द्रियाँ सात ही हैं)। व्याख्या—हाथ आदि ( हाथ, पैर, उपस्थ और गुदा ) अन्य चार इन्द्रियों- का वर्णन भी पूर्वोक्त सात इन्द्रियोके साथ-साथ दूसरी श्रुतियोमें स्पष्ट आता है ( प्र० उ० ४ । ८ ) तथा प्रत्येक मनुष्यके कार्यमे करणरूपसे हस्त आदि चारो इन्द्रियोका प्रयोग प्रत्यक्ष उपलब्ध है; इसलिये यह नहीं कहा जा सकता कि इन्द्रियाँ सात ही हैं। अतः जहाँ किसी अन्य उद्देश्यसे केवल सातोंका वर्णन हो, वहाँ भी इन चारोंको अधिक समझ लेना चाहिये। गीतामे भी मनसहित ग्यारह इन्द्रियाँ बतायी गयी हैं ( गीता १३ । ५ ) तथा बृहदारण्यक-श्रुतिमे भी दस इन्द्रिय और एक मन—इन ग्यारहका वर्णन स्पष्ट शब्दोमे किया गया है ( ३ । ९ । ४ ) । अतः इन्द्रियाँ सात नहीं ग्यारह हैं, यह मानना चाहिये। सम्बन्ध—इस प्रकार प्रसङ्गवश प्राप्त हुई शङ्काका निराकरण करते हुए मन- सहित इन्द्रियोंकी संख्या ग्यारह सिद्ध करके पुनः तत्त्वोंकी उत्पत्तिका वर्णन करते हैं— अणवश्च ॥ २ । ४ । ७ ॥ च=तथा; अणवः=सूक्ष्मभूत यानी तन्मात्राएँ भी उस परमेश्वरसे ही उत्पन्न होती हैं। व्याख्या—जिस प्रकार इन्द्रियोंकी उत्पत्ति परमेश्वरसे होती है, उसी प्रकार पाँच महाभूतोंका जो सूक्ष्मरूप है, जिसको दूसरे दर्शनकारोंने परमाणु- के नामसे कहा है तथा उपनिषदोंमें मात्राके नामसे जिनका वर्णन है ( प्र० उ० ४ । ८ ) वे भी परमेश्वरसे ही उत्पन्न होते हैं; क्योंकि वहाँ उनकी स्थिति उस परमेश्वरके आश्रित ही बतायी गयी है। कुछ महानुभावोका कहना है कि यह सूत्र इन्द्रियोंका अणु-परिमाण सिद्ध करनेके लिये कहा गया है, किन्तु प्रसङ्गसे यह ठीक मालूम नहीं होता। त्वक्-इन्द्रियको अणु नहीं कहा जा सकता; क्योंकि वह शरीरके किसी एक देशमे सूक्ष्मरूपसे स्थित न होकर समस्त