भारतकोश
ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press

महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished417 पृष्ठ

पृष्ठ 386, कुल 417 में से

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सूत्र ५-८ ] अध्याय ४ ,३६५ पास पहुँचा देता है, इस प्रकार श्रुतिमे स्पष्ट कहा जानेके कारण यही सिद्ध होता है कि विद्युत्-लोकसे आगे ब्रह्मलोकतक वही विद्युत्-लोकमें प्रकट अमानव पुरुष उनको पहुँचाता है, बीचके लोकोंके जो अभिमानी देवता हैं, उनका इतना ही काम है कि वे अपने लोकोमे होकर जानेके लिये उनको मार्ग दे दे और अन्य आवश्यक सहयोग करें। सम्बन्ध- ब्रह्मविद्याका उपासक अधिकारी विद्वान् वहाँ ब्रह्मलोकमे जिनको प्राप्त होता है, वह परब्रह्म है या सबसे पहले उत्पन्न होनेवाला ब्रह्मा ? इसका निर्णय करनेके लिये अगला प्रकरण आरम्भ किया जाता है, यहाँ पहले बादरि आचार्यकी ओरसे सातवें सूत्रसे ग्यारहवें सूत्रतक पूर्वपक्षकी स्थापना की जाती है— कार्यं बादरिरस्य गत्युपपत्तेः ॥ ४ । ३ । ७ ॥ बादरिः=आचार्य बादरिका मत है कि; कार्यम्=कार्यब्रह्मको, अर्थात् हिरण्यगर्भको (प्राप्त होते हैं); गत्युपपत्तेः=क्योंकि गमन करनेके कथनकी उपपत्ति; अस्य=इस कार्यब्रह्मके लिये ही (हो सकती है)। व्याख्या-श्रुतिमें जो लोकान्तरमे गमनका कथन है, वह परब्रह्म परमात्माकी प्राप्तिके लिये उचित नहीं है; क्योंकि परब्रह्म परमात्मा तो सभी जगह है, उनको पानेके लिये लोकान्तरमें जानेकी क्या आवश्यकता है, अतः यही सिद्ध होता है कि इन ब्रह्मविद्याकी उपासना करनेवालोंके लिये जो प्राप्त होनेवाला ब्रह्म है, वह परब्रह्म नहीं; किन्तु कार्यब्रह्म ही है; क्योंकि इस कार्यब्रह्मकी प्राप्तिके लिये लोकान्तरमें जाकर उसे प्राप्त करनेका कथन सर्वथा युक्तिसंगत है। सम्बन्ध-प्रकारान्तरसे अपने पक्षको दृढ करते हैं— विशेषितत्वाच्च ॥ ४ । ३ । ८ ॥ च=तथा; विशेषितत्वात्=विशेषण देकर स्पष्ट कहा गया है, इसलिये भी (कार्यब्रह्मकी प्राप्ति मानना ही उचित है)। व्याख्या-'मानस पुरुष इनको ब्रह्मलोकोमे ले जाता है' (बृह०उ० ६।२।१५) इस श्रुतिमें ब्रह्मलोकमे बहुवचनका प्रयोग किया गया है तथा ब्रह्मलोकोंमें ले जाने- की बात कही गयी है, ब्रह्मको प्राप्त होनेकी बात नहीं कही गयी, इस प्रकार विशेषरूपमे स्पष्ट कहा जानेके कारण भी यही सिद्ध होता है कि कार्यब्रह्मको

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