ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)
Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press
महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 52, कुल 417 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूत्र १२-१३ ] अध्याय १ ३१ ब्रह्मचारी सत्यकाम नामक ऋषिके आश्रममें रहकर ब्रह्मचर्यका पालन करता हुआ गुरुकी और अग्नियोंकी सेवा करता था । सेवा करते-करते उसे बारह वर्ष व्यतीत हो गये; परन्तु गुरुने उसे न तो उपदेश दिया और न स्नातक ही बनाया । इसके विपरीत उसीके साथ आश्रममे प्रविष्ट होनेवाले दूसरे शिष्योको स्नातक बनाकर घर भेज दिया । तब आचार्यसे उनकी पत्नीने कहा, 'भगवन् ! इस ब्रह्मचारीने अग्नियोकी अच्छी प्रकार सेवा की है । तपस्या भी इसने की ही है । अब इसे उपदेश देनेकी कृपा करे ।' परन्तु अपनी भार्याकी बातको अनसुनी करके सत्यकाम ऋषि उपकोशलको उपदेश दिये बिना ही बाहर चले गये । तब मनमे दुखी होकर उपकोशलने अनशन व्रत करनेका निश्चय कर लिया । यह देख आचार्य-पत्नीने पूछा —'ब्रह्मचारी ! तू भोजन क्यो नहीं करता है ?' उसने कहा, 'मनुष्यके मनमे बहुत-सी कामनाएँ रहती है । मेरे मनमे बड़ा दुःख है, इसलिये में भोजन नहीं करूँगा ।' तब अग्नियोने एकत्र होकर विचार किया कि 'इसने हमारी अच्छी तरह सेवा की है, अतः उचित है कि हम इसे उपदेश करे' ऐसा विचार करके अग्नियोने कहा—'प्राण ब्रह्म है, क ब्रह्म है, ख ब्रह्म है ।' उपकोशल बोला—'यह बात तो मै जानता हूँ कि प्राण ब्रह्म है । परन्तु 'क' और 'ख' को नहीं जानता ।' अग्नियोने कहा—'निस्सन्देह जो 'क' है, वही 'ख' है और जो 'ख' है, वही 'क' है तथा प्राण भी वही है ।' इस प्रकार उन्होने ब्रह्मको 'क' सुख-स्वरूप और 'ख' आकाशकी भाँति सूक्ष्म एव व्यापक बताया तथा वही प्राणरूपमे सबको सत्ता-स्फूर्ति देनेवाला है; इस प्रकार सकेतसे ब्रह्मका परिचय कराया । उसके बाद गार्हपत्य अग्निने प्रकट होकर कहा—'सूर्यमे जो यह पुरुष दीखता है, वह मै हूँ; जो उपासक इस प्रकार जानकर उपासना करता है, वह पापोका नाश करके अच्छे लोकोका अधिकारी होता है तथा पूर्ण आयुष्मान् और उज्ज्वल जीवनसे युक्त होता है । उसका वश कभी नष्ट नहीं होता ।' इसके बाद 'अन्वाहार्यपचन' अग्निने प्रकट होकर कहा, 'चन्द्रमामे जो यह पुरुष दिखायी देता है, वह मै हूँ । जो मनुष्य इस रहस्यको समझकर उपासना करता है, वह अच्छे लोकोका अधिकारी होता है ।' इत्यादि तत्पश्चात् आहवनीय अग्निने प्रकट होकर कहा, 'बिजलीमे जो यह पुरुष