बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ
पृष्ठ 1028, कुल 1402 में से
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| १०१४ | बृहदारण्यकोपनिषद् | [ अध्याय ४ |
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मुमूर्षु की दशाका वर्णन
| इत आरभ्यास्य संसारो वर्ण्यते; यथायमात्मा स्वप्नान्ताद् बुद्धान्तमागतः, एवमयमुस्माद् देहाद् देहान्तरं प्रतिपत्स्यत इत्याहात्र दृष्टान्तम्— | अब यहाँसे आगे संसारका वर्णन किया जाता है; जिस प्रकार यह आत्मा स्वप्नस्थानसे जागरित-स्थानमें आया है, उसी प्रकार यह इस देहसे दूसरे देहको प्राप्त होगा—सो इसमें श्रुति दृष्टान्त बतलाती है— |
तद् यथानः सुसमाहितमुत्सर्जद् यायादेवमेवायं शारीर आत्मा प्राज्ञेनात्मनान्वारूढ उत्सर्जन्याति यत्रैतदूर्ध्वोच्छ्वासी भवति ॥ ३५ ॥
लोकमें जिस प्रकार बहुत अधिक बोझ लादा हुआ छकड़ा शब्द करता चलता है, उसी प्रकार यह देही आत्मा प्राज्ञात्मासे अधिष्ठित हो शब्द करता हुआ जाता है, जब कि यह ऊर्ध्वोच्छ्वास छोड़नेवाला हो जाता है ॥ ३५ ॥
| तत्तत्र यथा लोकेऽनः शकटं सुसमाहितं सुष्ठु भृशं वा समाहितं भाण्डोपस्करणेन उलूखलमुसलशूर्पपिठरादिनान्नाद्येन च सम्पन्नं सम्भारेण आक्रान्तमित्यर्थः, तथा भाराक्रान्तं सदुत्सर्जञ्छब्दं कुर्वद् यथा यायाद् गच्छेच्छाकटिकेनाधिष्ठितं सत्, एवमेव यथोक्तो दृष्टान्तोऽयं शारीरः शरीरे भवः, | यहाँ जिस प्रकार लोकमें सुसमाहित—सुष्ठु अथवा अत्यन्त समाहित अर्थात् भाण्डादि गृहसामग्री—ऊखल, मूसल, सूप और पिठर^१ आदिसे तथा खाद्यसामग्रीसे सम्पन्न, तात्पर्य यह कि अत्यन्त बोझेसे लदा हुआ छकड़ा उपर्युक्त प्रकारसे बोझेसे दबा होनेके कारण गाड़ीवानके बैठकर हाँकनेपर शब्द करता चलता है, इसी प्रकार जैसा कि यह दृष्टान्त बताया गया है, यह शारीर अर्थात् शरीरमें |
१. थाली या मथानी।