बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ
पृष्ठ 1384, कुल 1402 में से
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॥ श्रीहरिः ॥
मन्त्राणां वर्णानुक्रमणिका
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | ब्रा० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| अग्नये स्वाहेत्यग्नौ हुत्वा ... | ६ | ३ | ३ | १३२४ |
| अत्र पितापिता भवति ... | ४ | ३ | २२ | ६७६ |
| अथ कर्मणामात्मेत्येतदेषा० ... | १ | ६ | ३ | ३६६ |
| अथ चक्षुरत्यवहत्तद्यदा ... | १ | ३ | १४ | १३० |
| अथ त्रयो वाव लोका ... | १ | ५ | १६ | ३६५ |
| अथ प्राणमत्यवहत्स यदा ... | १ | ३ | १३ | १२६ |
| अथ मनोऽत्यवहत्तद्यदा ... | १ | ३ | १६ | १३० |
| अथ य इच्छेत्पुत्रो मे कपिलः पिङ्गलो ... | ६ | ४ | १५ | १३५१ |
| अथ य इच्छेत्पुत्रो मे पण्डितो ... | ६ | ४ | १८ | १३५२ |
| अथ य इच्छेत्पुत्रो मे श्यामो ... | ६ | ४ | १६ | १३५२ |
| अथ य इच्छेद्दुहिता मे पण्डिता ... | ६ | ४ | १७ | १३५२ |
| अथ यदा सुषुप्तो भवति ... | २ | १ | १६ | ४४८ |
| अथ यद्युदक आत्मानं ... | ६ | ४ | ६ | १३४२ |
| अथ यस्य जायामार्तवं ... | ६ | ४ | १३ | १३४६ |
| अथ यस्य जायायै ... | ६ | ४ | १२ | १३४७ |
| अथ यामिच्छेद्दधीतेति ... | ६ | ४ | ११ | १३४६ |
| अथ यामिच्छेन्न गर्भं दधीतेति ... | ६ | ४ | १० | १३४५ |
| अथ ये यज्ञेन दानेन ... | ६ | २ | १६ | १३११ |
| अथ रूपाणां चक्षु० ... | १ | ६ | २ | ३६५ |
| अथ वं॒शः। पौतिमाषी० ... | ६ | ५ | १ | १३६३ |
| अथ वं॒शः। पौतिमाष्यो ... | २ | ६ | १ | ६१५ |
| अथ वं॒शः पौतिमाष्यो ... | ४ | ६ | १ | ११५८ |
| अथ श्रोत्रमत्यवहत्तद्यदा ... | १ | ३ | १५ | १३० |
| अथ ह चक्षुरूचुः ... | १ | ३ | ४ | ११२ |
| अथ ह प्राणं उत्क्रमि० ... | ६ | १ | १३ | १२६० |
| अथ ह प्राणमूचुस्त्वं न ... | १ | ३ | ३ | १११ |
| अथ ह मन ऊचुः ... | १ | ३ | ६ | ११३ |
| अथ ह याज्ञवल्क्यस्य द्वे ... | ४ | ५ | १ | ११२८ |
| अथ ह वाचक्नव्युवाच ... | ३ | ८ | १ | ७५८ |