बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ
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( १३६६ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | ब्रा० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| अथ ह श्रोत्रमूचुः | १ | ३ | ५ | ११२ |
| अथ हेममासन्यं प्राण० | १ | ३ | ७ | ११५ |
| अथ हैनमसुर्रा ऊचुः | ५ | २ | ३ | ११८३ |
| अथ हैनमुद्दालक आ० | ३ | ७ | १ | ७४१ |
| अथ हैनमुषस्तश्चाक्रा० | ३ | ४ | १ | ६६८ |
| अथ हैनं कहोलः कौ० | ३ | ५ | १ | ७०६ |
| अथ हैनं गार्गी वाच० | ३ | ६ | १ | ७३६ |
| अथ हैनं जारत्कारव | ३ | २ | १ | ६५२ |
| अथ हैनं भुज्युर्लाह्या० | ३ | ३ | १ | ६६० |
| अथ हैनं मनुष्या ऊचुः | ५ | २ | २ | ११८२ |
| अथ हैनं विदग्धः शा० | ३ | ९ | १ | ७८५ |
| अथ होवाच ब्राह्मणा | ३ | ९ | २७ | ८२३ |
| अथातः पवमानानामे० | १ | ३ | २८ | १५५ |
| अथातः सम्प्रत्तिर्यदा | १ | ५ | १७ | ३६६ |
| अथातो व्रतमीमाँसा | १ | ५ | २१ | ३८१ |
| अथात्मनेऽन्नाद्यमागा० | १ | ३ | १७ | १३१ |
| अथाधिदैवतं ज्वलिष्या० | १ | ५ | २२ | ३८६ |
| अथाध्यात्ममिदमेवं मूर्तं | २ | ३ | ४ | ५२१ |
| अथाभिप्रायरेव स्थाली० | ६ | ४ | १६ | १३५५ |
| अथामूर्तं प्राणश्च यश्चा० | २ | ३ | ५ | ५२३ |
| अथामूर्तं वायुश्चान्तरिक्षं | २ | ३ | ३ | ५१७ |
| अथास्य दक्षिणं कर्णम० | ६ | ४ | २५ | १३६० |
| अथास्य नाम करोति | ६ | ४ | २६ | १३६१ |
| अथास्य मातरमभिम० | ६ | ४ | २८ | १३६२ |
| अथास्या ऊरू विहाय० | ६ | ४ | २१ | १३५७ |
| अथेत्यभ्यमन्थत्स मुखाच्च | १ | ४ | ६ | १८१ |
| अथैतद्वामेऽक्षणि | ४ | २ | ३ | ८६१ |
| अथैतस्य प्राणस्यापः | १ | ५ | १३ | ३५५ |
| अथैतस्य मनसो द्यौः | १ | ५ | १२ | ३५३ |
| अथैनमग्नये | ६ | २ | १४ | १३०१ |
| अथैनमभिमृशति | ६ | ३ | ४ | १३२६ |
| अथैनमाचामति | ६ | ३ | ६ | १३२७ |
| अथैनमुद्यच्छत्यामँ ० | ६ | ३ | ५ | १३२७ |
| अथैनं मात्रे प्रदाय | ६ | ४ | २७ | १३६१ |