भारतकोश
बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ

पृष्ठ 22, कुल 1402 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 22

( १८ )

विषयपृष्ठ
### तृतीय अध्याय
प्रथम ब्राह्मण
११३—याज्ञवल्कीय काण्ड ... ... ...६१६
११४—राजा जनकका सर्वश्रेष्ठ ब्रह्मवेत्ताको सहस्र गौएँ दान करनेकी घोषणा करना ... ... ...६२०
११५—याज्ञवल्क्यका गौएं ले जानेके लिये अपने शिष्यको आज्ञा देना, ब्राह्मणोंका कोप, अश्वलका प्रश्न ... ... ...६२२
११६—मृत्युग्रस्त कर्मसाधनोंकी आसक्तिसे पार पानेका उपाय ...६२५
११७—अहोरात्रादिरूप कालसे अतिमुक्तिका साधन ... ...६२६
११८—तिथ्यादिरूप कालरूपसे अतिमुक्तिका साधन ... ...६३१
११९—परिच्छेदके विषयभूत मृत्युको पार करनेके आश्रयका वर्णन ...६३३
१२०—शस्त्रसम्बन्धी ऋचाएँ और उनसे प्राप्त होनेवाला फल ...६३७
१२१—होम-सम्बन्धिनी आहुतियाँ और उनसे प्राप्त होनेवाले फल ...६३८
१२२—ब्रह्माके यज्ञरक्षाके साधन और उससे प्राप्त होनेवाले फलका वर्णन ... ... ...६४१
१२३—स्तवनसम्बन्धिनी ऋचाओंका और उनसे प्राप्त होनेवाले फलका वर्णन ... ... ...६४४
द्वितीय ब्राह्मण
१२४—याज्ञवल्क्य-आर्तभाग-संवाद ... ...६४७
१२५—ग्रह और अतिग्रहकी संख्या एवं स्वरूप ... ...६५२
१२६—घ्राणादि इन्द्रियोंका ग्रहत्व और गन्धादि विषयोंका अतिग्रहत्वनिरूपण६५५
१२७—सर्वभक्षक मृत्यु किसका खाद्य है ? ... ...६५८
१२८—तत्त्वज्ञके देहावसानका क्रम ... ...६६०
१२९—इन्द्रियाभिमानी देवताओंके निवृत्त हो जानेपर अस्वतन्त्र कर्ता पुरुषकी स्थितिका विचार ... ...६६३
तृतीय ब्राह्मण
१३०—याज्ञवल्क्य-भुज्यु-संवाद ... ... ...६७१
१३१—पारिक्षित कहाँ रहे ? ... ... ...६८०
१३२—पारिक्षितोंकी गतिका वर्णन ... ... ...६८४
चतुर्थ ब्राह्मण
१३३—याज्ञवल्क्य-उषस्त-संवाद ... ... ...६८८