बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ
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( २० )
| विषय | पृष्ठ |
|---|---|
| १५८—आदित्य कौन हैं ? | ७६० |
| १५९—इन्द्र और प्रजापति कौन हैं ? | ७६० |
| १६०—छः देवताओंका विवरण | ७६१ |
| १६१—देवताओंकी तीन, दो और डेढ़ संख्याओंका विवरण | ७६२ |
| १६२—डेढ़ और एक देवका विवरण | ७६३ |
| १६३—प्राणब्रह्मके आठ प्रकारके भेद | ७६४ |
| १६४—शाकल्यको चेतावनी | ८०४ |
| १६५—देवता और प्रतिष्ठासहित दिशाओंके ज्ञानकी प्रतिज्ञा | ८०५ |
| १६६—देवता और प्रतिष्ठासहित पूर्वदिशाका वर्णन | ८०६ |
| १६७—देवता और प्रतिष्ठाके सहित दक्षिण दिशाका वर्णन | ८०६ |
| १६८—देवता और प्रतिष्ठाके सहित पश्चिम दिशाका वर्णन | ८११ |
| १६९—देवता और प्रतिष्ठाके सहित उत्तर दिशाका वर्णन | ८१३ |
| १७०—देवता और प्रतिष्ठाके सहित ध्रुवा दिशाका वर्णन | ८१५ |
| १७१—हृदय और शरीरका अन्योन्याश्रयत्व | ८१६ |
| १७२—समानपर्यन्त शरीरादिकी प्रतिष्ठा तथा आत्मस्वरूपका वर्णन और शाकल्यका शिरःपतन | ८१७ |
| १७३—याज्ञवल्क्यका सभासदोंको प्रश्न करनेके लिये आमन्त्रण | ८२३ |
| १७४—याज्ञवल्क्यके प्रश्न | ८२४ |
चतुर्थ अध्याय
प्रथम ब्राह्मण
| विषय | पृष्ठ |
|---|---|
| १७५—जनक-याज्ञवल्क्य-संवाद | ८४० |
| १७६—जनककी सभामें याज्ञवल्क्यका आगमन, जनकका प्रश्न | ८४१ |
| १७७—शैलिनिके बतलाये हुए वाक्-ब्रह्मकी उपासनाका फलसहित वर्णन | ८४२ |
| १७८—उदङ्कोक्त प्राण-ब्रह्मकी उपासनाका फलसहित वर्णन | ८४७ |
| १७९—बर्बुके बताये हुए चक्षुर्ब्रह्मकी उपासनाका फलसहित वर्णन | ८४६ |
| १८०—गर्दभीविपीतके कहे हुए श्रोत्रब्रह्मकी उपासनाका फलसहित वर्णन | ८५१ |
| १८१—जाबालोक्त मनोब्रह्मकी उपासनाका फलसहित वर्णन | ८५३ |
| १८२—शाकल्योक्त हृदयब्रह्मकी उपासनाका फलसहित वर्णन | ८५५ |
द्वितीय ब्राह्मण
| विषय | पृष्ठ |
|---|---|
| १८३—जनककी उपसत्ति | ८५७ |
| १८४—दक्षिणनेत्रस्थ इन्द्रसंज्ञक पुरुषका परिचय | ८६० |