बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ
पृष्ठ 28, कुल 1402 में से
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| विषय | पृष्ठ |
|---|---|
| पञ्चम ब्राह्मण | |
| २५४-प्रथमज सत्य-ब्रह्म और 'सत्य' नामके अक्षरोंकी उपासना | ११६४ |
| २५५-एक-दूसरेमें प्रतिष्ठित सत्यसंज्ञक आदित्यमण्डलस्थ और चाक्षुष पुरुष | ११६७ |
| २५६-अहःसंज्ञक आदित्यमण्डलस्थ पुरुषके व्याहृतिरूप अवयव | १२०० |
| २५७-अहंसंज्ञक चाक्षुष पुरुषके व्याहृतिरूप अवयव | १२०१ |
| षष्ठ ब्राह्मण | |
| २५८-हृदयस्थ मनोमय पुरुषकी उपासना | १२०२ |
| सप्तम ब्राह्मण | |
| २५९-विद्युद्ब्रह्मकी उपासना | १२०४ |
| अष्टम ब्राह्मण | |
| २६०-धेनुरूपसे वाक्की उपासना | १२०५ |
| नवम ब्राह्मण | |
| २६१-पुरुषान्तर्गत वैश्वानराग्नि, उसका घोष और मरणकालका सूचक अरिष्ट | १२०७ |
| दशम ब्राह्मण | |
| २६२-प्रकरणान्तर्गत उपासनाओंसे प्राप्त होनेवाली गति | १२०६ |
| एकादश ब्राह्मण | |
| २६३-व्याधि, श्मशानगमन और अग्निदाहमें परम तपदृष्टिका विधान | १२११ |
| द्वादश ब्राह्मण | |
| २६४-अन्न-प्राणरूप ब्रह्मकी उपासना और तद्विषयक आख्यान | १२१३ |
| त्रयोदश ब्राह्मण | |
| २६५-उक्थदृष्टिसे प्राणोपासना | १२१८ |
| २६६-यजुर्दृष्टिसे प्राणोपासना | १२१६ |
| २६७-सामदृष्टिसे प्राणोपासना | १२२० |
| २६८-क्षत्रदृष्टिसे प्राणोपासना | १२२१ |
| चतुर्दश ब्राह्मण | |
| २६९-गायत्र्युपासना | १२२२ |
| २७०-गायत्रीके प्रथम लोक-पादकी उपासना | १२२३ |