भारतकोश
बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ

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( २६ )

विषयपृष्ठ.
२६५-श्वेतकेतुका अपने पिताके पास आकर उलाहना देना... १२७६
२६६-पिता आरुणिका उनके विषयमें अपनी अनभिज्ञता बताकर उसे शान्त करना और उनका उत्तर जाननेके लिये प्रवाहणके पास आना१२८१
२६७-आरुणिका प्रवाहणसे अपने पुत्रसे पूछी हुई बात कहनेकी प्रार्थना करना... १२८३
२६८-प्रवाहणका उसे दैववर बताकर अन्य मानुषवर माँगनेके लिये कहना१२८४
२६९-आरुणिका आग्रह और प्रवाहणकी स्वीकृतिसे वाणीद्वारा उसका शिष्यत्व स्वीकार करना... १२८४
३००-प्रवाहणकी क्षमा-प्रार्थना और विद्यादानके लिये तत्पर होना... १२८६
३०१-चतुर्थ प्रश्नका उत्तर—पञ्चाग्निविद्या
१-द्युलोकाग्नि... १२८८
२-पर्जन्याग्नि... १२९४
३-इहलोकाग्नि... १२९६
४-पुरुषाग्नि... १२९८
५-योषाग्नि... १२९६
३०२-प्रथम प्रश्नका उत्तर—अन्त्येष्टि संस्काररूप अन्तिम आहुति... १३०१
३०३-पञ्चम प्रश्नका उत्तर—देवयानमार्गका वर्णन... १३०२
३०४-धूमयानमार्गका वर्णन तथा द्वितीय और तृतीय प्रश्नका उत्तर... १३११
तृतीय ब्राह्मण
३०५-श्रीमन्थकर्म और उसकी विधि... १३१८
३०६-मन्थकर्मकी सामग्री और हवनविधि... १३१६
३०७-हवनके मन्त्र... १३२४
३०८-मन्थाभिमर्शका मन्त्र... १३२६
३०९-मन्थको उठानेका मन्त्र... १३२७
३१०-मन्थभक्षणकी विधि... १३२७
३११-मन्थकर्मका वंश... १३३०
३१२-मन्थकर्मकी सामग्रीका विवरण... १३३३
चतुर्थ ब्राह्मण
३१३-संतानोत्पत्ति-विज्ञान अथवा पुत्रमन्थकर्म... १३३४
३१४-नाम-कर्म... १३६१
पञ्चम ब्राह्मण
३१५-समस्त प्रवचनका वंश... १३६३