भारतकोश
बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ

पृष्ठ 541, कुल 1402 में से

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पृष्ठ 541

| ब्राह्मण ३ ] | शाङ्करभाष्यार्थ | ५३५ | | :--- | :--- |

[संस्कृत-भाष्यम्][भाष्यार्थ]
एवं निरवशेषं सत्यस्य स्व- <br> <sub>परमात्मस्वरूप-</sub> रूपमभिधाय, यत्त- <br> <sub>निर्देशः</sub> त्सत्यस्य सत्यम- <br> वोचाम तस्यैव स्वरूपावधारणार्थं <br> <sub>ब्रह्मण</sub> इदमारभ्यते—अथा- <br> नन्तरं सत्यस्वरूपनिर्देशानन्तरम्, <br> यत्सत्यस्य सत्यं तदेवावशिष्यते <br> यस्मादतस्तस्मात्सत्यस्य सत्यं <br> स्वरूपं निर्देक्ष्यामः । आदेशो <br> निर्देशो ब्रह्मणः । कः पुनरसौ <br> निर्देशः ? इत्युच्यते--नेति नेती- <br> त्येवं निर्देशः । <br><br> ननु कथमाभ्यां 'नेति नेति' <br> इति शब्दाभ्यां सत्यस्य सत्यं <br> निर्दिदिक्षितम् इत्युच्यते— <br> सर्वोपाधिविशेषापोहेन । यस्मिन्न <br> कश्चिद्विशेषोऽस्ति—नाम वा रूपं <br> वा कर्म वा भेदो वा जातिर्वा <br> गुणो वा; तद्वारेण हि शब्द- <br> प्रवृत्तिर्भवति । न चैषां कश्चिद् <br> विशेषो ब्रह्मण्यस्ति; अतो न <br> निर्देष्टुं शक्यते—इदं तदिति <br> गौरसौ स्पन्दते शुक्लो विषाणीतिइस प्रकार सत्यके अशेष स्वरूपका निरूपण कर, जिसे हमने सत्यका सत्य कहा है, उसी ब्रह्मके स्वरूपका निश्चय करनेके लिये यह आगेका ग्रन्थ आरम्भ किया जाता है-अथ-अनन्तर अर्थात् सत्यके स्वरूपका निरूपण करनेके पश्चात्, क्योंकि जो सत्यका सत्य है वही बच रहता है, अतः-इसलिये हम सत्यके सत्य स्वरूपका निर्देश करेंगे । आदेश अर्थात् ब्रह्मका निर्देश । किंतु वह 'निर्देश' क्या है? सो बताया जाता है—'नेति नेति' इस प्रकार किया हुआ निर्देश । <br><br> किंतु 'नेति नेति' इन दो शब्दोंद्वारा सत्यके सत्यका निरूपण किस प्रकार अभीष्ट है, सो बतलाया जाता है—समस्त उपाधिरूप विशेषके निषेधद्वारा [ उसका निरूपण किया गया है ] जिसमें कि नाम, रूप, कर्म, भेद, जाति अथवा गुणरूप कोई भी विशेषता नहीं है; क्योंकि शब्दकी प्रवृत्ति तो इन्हींके द्वारा होती है । किंतु ब्रह्ममें इनमेंसे कोई भी विशेषता नहीं है, इसलिये 'यह अमुक है' इस प्रकार उसका निर्देश नहीं किया जा सकता । जिस प्रकार लोकमें 'यह बैल चेष्टा करता है, श्वेत है, सींगोंवाला है' ऐसा कहकर