भारतकोश
बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ

पृष्ठ 647, कुल 1402 में से

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पृष्ठ 647

ब्राह्मण १ ] शाङ्करभाष्यार्थ ६३७


शस्त्रसम्बन्धी ऋचाएँ और उनसे प्राप्त होनेवाला फल

याज्ञवल्क्येति होवाच कतिभिरयमद्यर्ग्भिर्होता-
स्मिन् यज्ञे करिष्यतीति तिसृभिरिति कतमास्तास्तिस्र
इति पुरोनुवाक्या च याज्या च शस्यैव तृतीया किं
ताभिर्जयतीति यत्किञ्चेदं प्राणभृदिति ॥ ७ ॥

'हे याज्ञवल्क्य !' ऐसा अश्वलने कहा, 'आज कितनी ऋचाओंके द्वारा होता इस यज्ञमें शस्त्र-शंसन करेगा?' [याज्ञवल्क्यने कहा-] 'तीनके द्वारा।' [अश्वल—] 'वे तीन कौन-सी हैं? [याज्ञवल्क्य-] 'पुरोनुवाक्या, याज्या और तीसरी शस्या।' [अश्वल-] 'इनसे यजमान किसको जीतता है?' [याज्ञवल्क्य—] 'यह जितना भी प्राणिसमुदाय है। [उस सबको जीत लेता है]' ॥ ७ ॥


संस्कृत-भाष्यहिन्दी-अनुवाद
याज्ञवल्क्येति होवाच अभिमुखीकरणाय। कतिभिरयमद्यर्ग्भिर्होतास्मिन् यज्ञे कतिभिः कतिसङ्ख्याभिर्ऋग्भिर्ऋग्जातिभिः अयं होतर्त्विगस्मिन् यज्ञे करिष्यति शस्त्रं शंसति। **आहेतरः—तिसृभि-**र्ऋग्जातिभिः। इत्युक्तवन्तं प्रत्याहेतरः—कतमास्तास्तिस्र इति। सङ्ख्येयविषयोऽयं प्रश्नः, पूर्वस्तु सङ्ख्याविषयः।अपने अभिमुख करनेके लिये अश्वलने 'हे याज्ञवल्क्य !' ऐसा कहा। 'कतिभिरयमद्यर्ग्भिर्होतास्मिन् यज्ञे—आज यह होता इस यज्ञमें कितनी ऋचाओं अर्थात् कितनी संख्यावाली ऋग्जातियोंद्वारा शस्त्र-शंसन करेगा?' इसपर इतर (याज्ञवल्क्य) ने कहा, 'तीन ऋग्जातियोंद्वारा।' इस प्रकार कहनेवाले याज्ञवल्क्यसे अश्वलने कहा, 'वे तीन कौन-कौन हैं?' यह प्रश्न जिनकी [तीन—यह] संख्या की गयी है, उन ऋग्जातियोंके विषयमें है तथा इससे पहला प्रश्न उनकी संख्याके विषयमें था।