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भारतकोश
बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,008 पृष्ठ

पृष्ठ 777, कुल 1008 में से

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पृष्ठ 777

अथ त्र्यशीतितमोऽध्यायः श्रीशौनक उवाच साधु सूत महाभाग जगदुद्धारकारकम् । महातंत्रविधानं नः कुमारोक्तं त्वयोदितम् ॥१॥ अलभ्यमेतत्तंन्त्रेषु पुराणेष्वपि मानद । यदिहोदितमस्मभ्यं त्वयातिकरुणात्मना ॥२॥ नारदो भगवान्सूत लोकोद्धरणतत्परः । भूयः पप्रच्छ किं साधो कुमारं विदुषां वरम् ॥३॥ सूत उवाच श्रुत्वा स नारदो विप्राः युग्मनामसहस्रकम् । सनत्कुमारमप्याह प्रणम्य ज्ञानिनां वरम् ॥४॥ नारद उवाच ब्रह्मंस्त्वया समाख्याता विधयस्तंत्रचोदिताः । तत्रापि कृष्णमंत्राणां वैभवं ह्युदितं महत् ॥५॥ या तत्र राधिका देवी सर्वाद्या समुदाहृता । तस्या अंशावताराणां चरितं मंत्रपूर्वकम् ॥६॥ तंत्रोक्तं वद सर्वज्ञ त्वामहं शरणं गतः । शक्तेस्तंत्राण्यनेकानि शिवोक्तानि मुनीश्वर ॥७॥ यानि तत्सारमुद्धृत्य साकल्येनाभिधेहि नः । तच्छ्रुत्वा वचनं तस्य नारदस्य महात्मनः ॥८॥ सनत्कुमारः प्रोवाच स्मृत्वाराधापदांबुजम् सनत्कुमार उवाच ॥८॥ श्रृणु नारद वक्ष्यामि राधांशानां समुद्भवम्

अध्याय ८३ राधा के अंश से उत्पन्न पाँच प्रकृतियों का लक्षण श्री शौनक बोले—महाभाग सूत ! साधुवाद ! आपने सनत्कुमार द्वारा कथित एवम् जगदुद्धारकारक महातंत्र का विधान हमने बता दिया ! मानदायक ! वह विधान तंत्रों में तथा पुराणों में भी अलभ्य है, जिसे आपने अत्यन्त कृपा करके हमें बतलाया है । सूत ! साधो ! लोगों के उद्धार करने में तत्पर भगवान् नारद ने विद्वद्वर कुमार से पुनः क्या प्रश्न किया ? ॥१-३॥ सूत बोले—विप्रवृन्द ! युगल सहस्र नाम को सुन कर नारद ने महाज्ञानी सनत्कुमार से प्रणामपूर्वक कहा ॥४॥ नारद बोले—ब्रह्मन् ! आपने मंत्र की विधियां बतलाईं, कृष्ण मंत्रों का महान् वैभव भी बतला दिया । अब जो राधिका देवी सब की आदि कही जाती हैं, उनके अंशावतारों का चरित्र मंत्रपूर्वक बता दीजिये, जो तंत्र के अनुकूल हो । सर्वज्ञ ! मैं आपका शरणापन्न हूँ । मुनीश्वर ! शिव ने शक्ति के अनेक तंत्र कहे हैं उन्हीं का सार निकाल कर आप विस्तार से वर्णन कीजिये । महात्मा नारद का यह वचन सुनकर सनत्कुमार राधा के चरणारविन्द का स्मरण करके कहने लगे ॥५-८½॥ सनत्कुमार बोले—नारद सुनो, मैं मंत्रों का साधन बताते हुए राधा के अंशों से उत्पन्न शक्तियों का