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भारतकोश
बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,008 पृष्ठ

पृष्ठ 843, कुल 1008 में से

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पृष्ठ 843

८२४ नारदीयपुराणम् ।॥७०॥ दमनादित्रयभ्यर्चा षट्कर्मसिद्धिदायिनी । तिथिवारपृथग्द्रव्यसमर्चनशुभावहा ॥७१॥ वायोश्वानंगकुसुमा तथैवानंगमेखला । अनंगमदनानंगमदनातुरासाह्वया ॥७२॥ मददेविर्निका चैव तथा भुवनपालिनी । शशिलेखा समुद्दिष्टा गतिलेखाह्वया मता ॥७३॥ श्रद्धा प्रीती रतिश्चैव धृतिः कांतिर्मनोरमा । मनोहरा समाख्याता तथैव हि मनोरथा ॥७४॥ मदनोन्मादिनी चैव मोदिनी शंखिनी तथा । शोषिणी चैव शंकरी सिजिनी सुभगा तथा ॥७५॥ पुषाचैद्वासुमनसा रतिः प्रीतिधृतिस्तथा । ऋद्धिः सौम्या मरीचिश्व तथैव ह्यंशुमालिनी ॥७६॥ शशिनी चांगिरा छाया तथा संपूर्णमंडला । तुष्टिस्तथामृताख्या च डाकिनी साथ लोकपा ॥७७॥ बटुकेभास्वरूपा च दुर्गा क्षेत्रेशरूपिणी । कामराजस्वरूपा च तथा मन्मथरूपिणी ॥७७॥ कंदर्परूपिणी चैव तथा मकरकेतना । मनोभावस्वरूपा च भारती वर्णरूपिणी ॥७८॥ मदना मोहिनी लोला जंभिनी चोद्यमा शुभा । ह्लादिनी द्राविणी प्रोती रती रक्ता मनोरमा ॥७६॥ सर्वोन्मादा सर्वमुखा ह्यभंगा चामितोद्यमा । अनल्पाव्यक्तविभवा विविधाक्षोभविग्रहा ॥८०॥ रागशक्तिद्वेषशक्तिस्तथा शब्दादिरूपिणी । नित्या निरंजना विलिन्ना क्लेदिनी मदनातुरा ॥८१॥ मदद्रवा द्राविणी च द्रविणी चेति कीर्तिता । मदा विला मंगला च मन्मथानी मनस्विनी ॥८२॥ मोहा मोदा मानमयी माया मंदा मितावती । विजया विमला चैव शुभा विश्वा तथैव च ॥८३॥ विभूतिर्बिनता चैव विविधा विनता क्रमात् । कमला कामिनी चैव किराता कीर्तिरूपिणी ॥८४॥ कुट्टिनी च समुद्दिष्टा तथैव कुलसुंदरी । कल्याणी कालकोला च डाकिनी शाकिनी तथा ॥८५॥ लाकिनी काकिनी चैव राकिनी काकिनी तथा । इच्छाज्ञाना क्रियाख्या चाप्यायुधाष्टकधारिणी ॥८६॥ कपर्दिनी समुद्दिष्टा तथैव कुलसुंदरी । ज्वालिनी विस्फुलिंगा च मंगला सुमनोहरा ॥८७॥ आत्मरूपिणी, अष्टाक्षर कहलानेवाली, पंचपूजनस्वरूपा, अनेक व्रतों वाली, निषिद्ध आचरण से रहिता, सिद्धचिह्नस्वरूपा, चार प्रकार से कर्म-भोगों में अवस्थिता नित्य आदि की पूजा स्वरूपा, दमना आदि को अर्चा- रूपा, छह कर्मों को सिद्धि प्रदान करनेवाली, तिथि, दिन, द्रव्य, पूजन तथा मंगलरूपा, वायोश्वो, अनंगकुसुमा, अनंगमेखला, अनंगमदना, अनंगमदनातुरा, मददेविर्निका, भुवनपालिनी, शशिलेखा, गतिलेखा, श्रद्धाप्रीति, रति, धृति, कांति, मनोरमा, मनोहरा, मनोरथा ॥६३-७३॥ मदनोन्मादिनी, मोदिनी, शंखिनी, शोषिणी, शंकरी, सिजिनी, सुभगा, पूषा, वासुमनसा, रति, प्रीति, धृति, ऋद्धि, सौम्या, मरीचि, अंशुमालिनी, शशिनो, आंगरा, छाया, संपूर्णमंडला, तुष्टि, अमृता, डाकिनी, लोकपा, बटुका, भास्वरूपा, दुर्गा, क्षेत्रेशरूपिणी, कामराजस्वरूपा, मन्मथरूपिणी, कंदर्परूपिणी, मकरकेतना, मनो- भवस्वरूपा, भारती, वर्णरूपिणी ॥७४-७८॥ मदना, मोहिनी, लोला, जंभिनी, उद्यमा, शुभा, ह्लादिनी, द्राविणी, प्रीति, रति, रक्ता, मनोरमा, सर्वोन्मादा, सर्वमुखा, अभंगा, अमितोद्यमा, अनल्पा, तथा अव्यक्त विभव वाली, विविधा, क्षोभविग्रहा, रागशक्ति, द्वेषशक्ति, शब्दादिरूपिणी, नित्या निरंजना, क्लिन्ना, क्लेदिनी, मदना- तुरा, मदद्रवा, द्राविणी, द्रविणी, मदाविला, मंगला, मन्मथानी, मनस्विनी, मोहा, मोदा, मानमयी, माया, मंदा, मितावती, विजया, विमला, शुभा, विश्वा, विभूति, विनता, कमला, कामिनी, किराता, कीर्तिरूपिणी, कुट्टिनी, कुलसुन्दरी, कल्याणी, कालकोला, डाकिनी, शाकिनी, लाकिनी, काकिनी, राकिनी, इच्छा, ज्ञान एवंम् क्रिया- रूपा, अष्टायुधधारिणी, कपर्दिनी, ज्वालिनी, विस्फुलिंगा, मंगला, सुमनोहरा, कनका, विनवा, विद्या, मेधा,