बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)
Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंएकादशोऽध्यायः ६१ सैवावशिष्टा जननी सुराणामन्वाच्छतादच्युतसक्तचित्ता । संरक्षिता विष्णुसुदर्शनेन दैत्यान्तकेन स्वजनानुकम्पिना ॥५२॥ इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणे पूर्वभागे प्रथमपादे गङ्गोत्पत्तौ बलिकृतदेवपराजय- वर्णनन्नाम दशमोऽध्यायः ॥१०॥
एकादशोऽध्यायः नारद उवाच अहो ह्यत्यद्भुतं प्रोक्तं त्वया भ्रातरिहं मम । स वह्निरदितिं मुक्त्वा कथं तानदहत्क्षणात् ॥१॥ वदादितेर्महासत्त्वं विशेषाश्चर्यकारणम् । परोपदेशनिरताः सज्जना हि मुनीश्वराः ॥२॥ सनक उवाच शृणु नारद माहात्म्यं हरिभक्तिरतात्मनाम् । हरिध्यानपरान्साधूनकः समर्थः प्रबाधितुम् ॥३॥ हरिभक्तिपरो यत्र तत्र ब्रह्मा हरिः शिवः । देवाः सिद्धा मुनेशाश्च नित्यं तिष्ठन्ति सत्तमाः ॥४॥ हरिरास्ते महाभाग हृदये शान्तचेतसाम् । हरिनाम्पराणां च किमु ध्यानरतात्मनाम् ॥५॥ शिवपूजारतो वाऽपि विष्णुपूजापरोऽपि वा । यत्र तिष्ठति तत्रैव लक्ष्मीः सर्वाश्च देवताः ॥६॥
में लगी रहने वाली केवल जननी अदिति ही केवल, अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि रखने वाले, दैत्य संहारक विष्णु के सुदर्शन की कृपा से रक्षित होने के कारण बच गई ॥४६-५२॥ श्रीनारदीयपुराण के पूर्वभाग- प्रथम पाद में गंगोत्पत्ति के प्रसंग में बलि-कृत देव-पराजय वर्णन नामक दसवाँ अध्याय समाप्त ॥१०॥
अध्याय ११ गङ्गोत्पत्ति-वर्णन नारद बोले- भाई ! तुमने तो अत्यन्त आश्चर्यजनक यह आख्यान सुनाया। उस अग्नि ने कैसे अदिति को छोड़कर सब को क्षण भर में जला दिया ? अदिति के आश्चर्य चकित कर देने वाले उस महा तेज और प्रभाव का वर्णन करो, क्योंकि मुनीश्वर सर्वदा दूसरों को उपदेश देने में ही निरत होते हैं ॥१॥ सनक बोले- नारद ! हरि-भक्ति में सर्वदा लीन रहने वाले भक्तों की महिमा सुनो। हरि के ध्यान में मग्न रहने वाले साधुओं को कौन कष्ट देने का साहस कर सकता है ? जहाँ हरिभक्त रहते हैं वहाँ ब्रह्मा, विष्णु, शिव, देवगण, सिद्ध मुनीश्वर, श्रेष्ठ जीव सर्वदा विराजमान रहते हैं। महाभाग ! परमशान्त, हरिनास-परायण भक्तों के हृदय में भगवान् सर्वदा विराजमान रहते हैं, तो पुनः हरि ध्यान में निमग्न रहने वाले योगो भक्तों के विषय में तो कुछ कहना ही नहीं। शिवपूजन में रत रहने वाले विष्णु की पूजा में लीन रहने वाले भक्त जहाँ निवास करते हैं वहाँ साक्षात् लक्ष्मी और सब देवता सर्वदा निवास करते हैं ॥२-६॥ जहाँ विष्णु पूजा में तल्लीन