भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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कारकांशफलमाह ११३ यदि आत्मकारक मेष राशि के नवांश में हो तो मूसा, बिलार दुःख देते हैं।।४।। सुयोगे च यदा विप्र मार्जारादि सुखप्रदौ। वृषे च कारकांशे तु भयार्ती च चतुष्पदात् ।।५।। शुभग्रह के योग से मूसा, बिलार आदि सुख देते हैं। वृष का नवांश हो तो चौपाये जानवरों से भय होता है।।५।। शुभे चतुष्पदात्सिद्धिरीति तत्त्वं द्विजोत्तम। मिथुने कारकांशे च कण्ड्वादिरोगसम्भवः।।६।। शुभग्रह का योग हो तो चौपायों से सुख होता है। मिथुन के नवांश में कारक हो तो खुजली आदि रोगों की संभावना होती है।।६।। कर्कांशे च जलाद्दुःखं जलभीतिर्न संशयः। कुष्ठादिरोगसम्भूतिः शुभे फलविपर्ययः।।७।। कर्क के नवांश में कारक हो तो जल से कष्ट वा जल का भय और कुष्ठ आदि रोग की संभावना होती है।।७।। सिंहांशे कारके खेटे तिष्ठत्येवं द्विजोत्तम। शुनकादि भयं दद्याच्छुभे सिद्धिप्रदायकः।।८।। सिंह के नवांश में हो तो खाज आदि से भय होता है। शुभग्रह का योग हो तो शुभ फल होता है।।८।। उदाहरण— पृष्ठ २५ के दिये हुए स्पष्ट ग्रहों के अनुसार चरकारक इस प्रकार है – चरकारकाः

आत्म-कारकअनात्म-कारकभ्रातृ-कारकमातृ-कारकपुत्र-कारकजाति-कारकदारा-कारक
भौमचंद्रमासूर्यगुरुबुधशुक्रशनि