बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् महिषह्वगजतैलवस्त्रशृङ्गार- प्रयाणसर्वराज्यसर्वायुधगृहयुद्ध- सञ्चारशूद्रनीलमणिविघ्नकेशशल्य- शूलरोगदासदासीजनायुष्यकारकः शनिः॥७॥ भैंस, घोड़ा, हाथी, तेल, वस्त्र, शृंगार, यात्रा, सभी प्रकार के राज्य, सभी प्रकार के आयुध, गृह, युद्ध संचार, शूद्र, नीलममणि, विघ्न, केश, हड्डी, शूलरोग, नौकर, नौकरानी, आयुष्य के कारक शनि है॥७॥ प्रयाणसमयसर्परात्रिसकलसुप्तार्थद्यूतकारको राहुः॥८॥ यात्राकाल, सर्प, रात्रि, सम्पूर्ण खोये हुए द्रव्य, जूआ का कारक राहु है॥८॥ व्रणरोगचर्मातिशूलस्फुटक्षुधार्तिकारकः केतुः॥९॥ फोड़ा आदि रोग, चर्मरोग, अत्यंत शूल, भूख से कष्ट आदि का कारक केतु है॥९॥ इति कारकाध्यायः। अथ कारकांशफलमाह अधुना सम्प्रवक्ष्यामि कारकांशाधिकान् ग्रहान्। योगसम्बन्धमात्रेण यथावत् फलदा ग्रहाः॥१॥ अब मैं कारकांश के स्वामी ग्रहों के फल को कह रहा हूँ, जिसके संबंध मात्र से योग का फल प्राप्त होता है॥१॥ स्वांशकारककुण्डल्यां नवमांशाधिपोऽथवा। यस्मिन् राशौ स्थितो विप्र तद्राशिफलमुच्यते॥२॥ आत्मकारकांश कुंडली में नवांश के अधिपति जिस राशि में हों उसके अनुसार फल होता है॥२॥ मेषादिमीनपर्यन्तं सर्वेषां फलमादिशेत्। यथावद्भाषितं पूर्व शूलिना रुद्रयामले॥३॥ मेष से मीन पर्यन्त सभी राशियों का फल इस प्रकार है॥३॥ अस्वांशकारकांशेषु तिष्ठन्ति च यदा ग्रहाः। तदा मूषकमार्जारौ दुःखदौ भयकारकौ॥४॥