बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसूर्यादिग्रहाणां कारकत्वमाह १११ अथ सूर्यादिग्रहाणां कारकत्वमाह राज्यविद्दुमरक्तवस्त्रमाणिक्यराजवन- पर्वतक्षेत्रपितृकारको रविः॥१॥ राज्य, मूँगा, रक्तवस्त्र, मानिक, राज, वन, पर्वत, क्षेत्र और पिता का कारक सूर्य होता है॥१॥ मातृमनःपुष्टिगन्धरसेक्षुगोधूमक्षारक- द्विजशक्तिकार्यसस्यरजतादिकारकश्चन्द्रः॥२॥ माता, मन, शरीरपुष्टि, गंधद्रव्य, रस, ऊख, गेहूँ, क्षारपदार्थ, ब्राह्मण, शक्तिकार्य, धान्य और चाँदी आदि का कारक चन्द्रमा है॥२॥ सत्त्वसद्मभूमिपुत्रशीलचौर्यरोगब्रह्मभ्रातृ- पराक्रमाग्निसाहसराजशत्रुकारकः कुजः॥३॥ ओज, भूमि, पुत्र, शील, चोर, रोग, ब्रह्म, भाई, पराक्रम, अग्नि, साहस और राजशत्रु के कारक भौम हैं॥३॥ ज्योतिर्विद्यामातुलगणितकार्यनर्तनवैद्य- हास्यभीश्रीशिल्पविद्यादिकारको बुधः॥४॥ ज्योतिष विद्या, मामा, गणित विद्या, नृत्य, वैद्यक, हास्य, भय, लक्ष्मी, शिल्पविद्या का कारक बुध है॥४॥ स्वकर्मयजनदेवब्राह्मणधनगृहकाञ्चन- वस्त्रपुत्रमित्रान्दोलनादिकारको गुरुः॥५॥ अपने कार्य, यज्ञ, देवता, ब्राह्मण, धन, गृह, सुवर्ण, वस्त्र, पुत्र, मित्र, आंदोलन आदि के कारक गुरु हैं॥५॥ कलत्रकार्मुकसुखगीतशास्त्र- काव्यपुष्पसुकुमारयौवनाभरणरजत- यानस्वर्गलोकमौक्तिक- विभवकवितारसादिकारको भृगुः॥६॥ स्त्री, धनुष, सुख, गीतशास्त्र, काव्यशास्त्र, पुष्प, यौवन, आभूषण, चाँदी, सवारी, स्वर्गलोक, मोती, वैभव, कविता, रस आदि के कारक शुक्र हैं॥६॥