भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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कारकांशफलमाह १२३ कारकांशाद्दशमभावफलम्- दशमे कारकांशाच्च बुधेन समवीक्षिते। व्यापारे बहुलाभश्च महत्कर्मविचक्षणः ।।६९।। कारकांश से दशम भाव बुध से देखा जाता हो तो व्यापार में बहुत लाभ और बड़े-बड़े काम होते हैं।।६९।। कारकांशाच्च दशमे रविणा संयुतो यदि। गुरुदृष्टे तदा विप्र जायते योगकारकः ।।७०।। कारकांश से दशम में रवि हो और गुरु से देखा जाता हो तो राजयोग होता है।।७०।। कारकांशाच्च दशमे शुभखेटनिरीक्षिते। स्थिरचित्तो भवेद्बालो गम्भीरो बहुवीर्यवान् ।।७१।। कारकांश से दशम भाव को शुभग्रह देखता हो तो बालक स्थिरचित्त, गंभीर और बलवान् होता है।।७१।। कारकांशद्व्ययभावफलम्- कारकांशाद्व्ययस्थाने उच्चस्थे च शुभग्रहे। सङ्गतिर्जायते तस्य शुभलोकमवाप्नुयात् ।।७२।। कारकांश से बारहवें भाव में अपनी उच्चराशि में कोई शुभग्रह हो तो उस जातक को सद्गति और शुभ लोक की प्राप्ति होती है।।७२।। कारकांशाद्व्यये केतौ शुभखेटैर्युतेक्षिते। तदापि जायते मुक्तिः सायुज्यपदमाप्नुयात् ।।७३।। कारकांश से बारहवें भाव में केतु हो, शुभग्रह से देखा जाता हो वा दृष्ट हो तो भी मुक्ति होती है और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।।७३।। मेषेऽथ वापि कोदण्डे कारकांशात् व्यये शिखी। शुभग्रहेण सन्दृष्टे कैवल्यपदमाप्नुयात् ।।७४।। कारकांश से बारहवें भाव में मेष वा धन राशि मैं केतु हो, शुभग्रह से दृष्ट हो तो मोक्षपद की प्राप्ति होती है।।७४।। केवलेऽपि व्यये केतुः पापग्रहयुतेक्षिते। न मुक्तिर्जायते तस्य शुभलोकं न पश्यति ।।७५।।