बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् कारकांशत्रवमभावफलम्— कारकांशाच्च नवमे शुभखेटयुतेक्षिते। सत्यवादी गुरोर्भक्तः स्वधर्मनिरतो भवेत्।।६२।। कारकांश से नवम स्थान शुभग्रह से युत-दृष्ट हो तो जातक सत्यवादी, गुरुभक्त, अपने धर्म में आसक्त होता है।।६२।। कारकांशाच्च नवमे पापग्रहयुतेक्षिते। स्वधर्मनिरतो बालो मिथ्यावादी भवेद्द्विज।।६३।। कारकांश से नवम स्थान पापग्रह से युत-दृष्ट हो तो अपने धर्म से रहित और असत्यवादी होता है।।६३।। कारकांशाच्च नवमे शनिराहुयुतेक्षिते। गुरुद्रोही भवेद्विप्र शास्त्रेषु विमुखो नरः।।६४।। कारकांश से नवम भाव शनि-राहु से दृष्ट-युत हों तो गुरु से द्रोह करने वाला और मूर्ख होता है।।६४।। कारकांशाच्च नवमे गुरुभानुयुतेक्षिते। तदापि गुरुद्रोही स्याद्गुरुवाक्यं न मन्यते।।६५।। कारकांश से नवम भाव गुरु-सूर्य से युत-दृष्ट हों तो भी गुरुद्रोही और गुरु के वचन को न माननेवाला होता है।।६५।। कारकांशाच्च नवमे भृगुभौमयुतेक्षिते। षड्वर्गाधिकयोगे च मरणं पारदारिकः।।६६।। कारकांश से नवम भाव शुक्र-भौम से युत-दृष्ट हों तो और इन्हीं का षड्वर्ग अधिक हो तो परस्त्री के द्वारा मरण होता है।।६६।। कारकांशाच्च नवमे बुधयुक्तेक्षिते द्विज। परस्त्रीसङ्गमाद्बालो बन्धको जायते ध्रुवम्।।६७।। कारकांश से नवम भाव बुध से युत-दृष्ट हो तो परस्त्रीसंगम से दुष्ट प्रकृति का होता है।।६७।। कारकांशाच्च नवमे गुरुयुक्तेक्षिते यदा। स्त्रीलोलुपो भवेद्बालो विषयी नैव जायते।।६८।। कारकांश से नवम भाव गुरु से युत-दृष्ट हो तो स्त्रीलोलुप होता है, किंन्तु विषयी नहीं होता है।।६८।।