भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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द्वादशभावविचाराध्यायः १५९ सुखेश केंद्र में हो और शुक्र भी केंद्र में हो, बुध अपनी उच्च राशि में हो तो बालक विद्वान् एवं पंडित होता है।।६८।। सुखे मन्दे रवियुते चन्द्रो भाग्यगतो यदि। लाभस्थानगते भौमे गोमहिष्यादिलाभकृत् ।।६९।। सुखस्थान में रवि-शनि हों, चंद्रमा नवम स्थान में हो और लाभस्थान में भौम हो तो गाय, भैंस आदि का लाभ होता है।।६९।। लग्नस्थानाधिपे सौम्ये सुखेशे नीचराशिगे। कारके व्ययराशिस्थे सुखेशे लाभसंयुते ।।७०।। द्वादशे वत्सरे प्राप्ते लाभो वै वाहनस्य च। वाहने रविसंयुक्ते स्वोच्चे तद्राशिनायके ।।७१।। कर्मेशेन युते बन्धुनाथे तुङ्गांशसंयुते। शुक्रेण संयुते तत्र द्वात्रिंशे वाहनं भवेत् ।।७२।। लग्नेश शुभग्रह हो, सुखेश नीच राशि में हो, कारक बारहवें भाव में हो और सुखेश ११वें भाव में हो तो ।।७०।। १२वें वर्ष में वाहन का लाभ होता है। सुख भाव में रवि हो, सुखेश अपनी उच्चराशि का हो और शुक्र से युक्त हो तो ३२ वें वर्ष में वाहन का लाभ होता है।।७१।। द्विचत्वारिंशके प्राप्ते नरोवाहनभाग्भवेत्। कर्मेश युत होकर सुखेश अपनी उच्च राशि में हो तो ४२वें वर्ष में वाहन प्राप्त होता है।।७२।। लाभेशे सुखराशिस्थे सुखेशे लाभसंयुते ।।७३।। द्वादशे वत्सरे प्राप्ते नरो वाहनलाभकृत्। भावपस्य शुभत्वे तु फलं ज्ञेयं शुभं बुधैः।।७४।। लाभेश सुख भाव में और सुखेश लाभ भाव में हो।।७३।। तो १२वें वर्ष में वाहन का लाभ होता है। भावेश और भाव की शुभता के आधार पर ही शुभफल की प्राप्ति होती है।।७४।। चरग्रहसमायुक्ते सुखे तद्राशिनायके। षष्ठे भौमे व्ययगते मूकत्वं प्राप्यते नरः।।७५।। सुख भाव चरग्रह से युक्त हो तथा सुखेश छठे भाव में और व्ययभाव में भौम हों तो जातक मूक (गूंगा) होता है।।७५।।