बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् अथ पञ्चमभावफलम्- षडादित्रयसंस्थे तु सुताधीशे त्वपुत्रता। केन्द्रत्रिकोणसंस्थे तु पुत्रलाभाभिसम्भवः॥७६॥ पंचमेश ६।८।१२वें भाव में हो तो संतान का अभाव होता है। यदि केंद्र वा त्रिकोण में हो तो संतान का सुख होता है॥७६॥ षष्ठस्थाने सुताधीशे लग्नेशे कुजवेश्मनि। म्रियते प्रथमापत्यं काकवन्ध्यत्वमाप्नुयात्॥७७॥ छठे भाव में पंचमेश हो और लग्नेश भौम की राशि में हो तो प्रथम संतान नष्ट हो जाती है तथा स्त्री काकवंध्या होती है॥७७॥ सुताधीशो हि नीचस्थः षडादित्रयसंस्थितः। काकवन्ध्या भवेन्नारी सुते केतुबुधौ यदि॥७८॥ पंचमेश अपनी नीचराशि का ६।८।१२वें भाव में हो और पाँचवें भाव में केतु-बुध हो तो स्त्री काकवंध्या होती है॥७८॥ सुतेशो नीचगो यत्र सुतस्थानं न पश्यति। सुते सौरिबुधौ स्यातां काकवन्ध्यत्वमाप्नुयात्॥७९॥ पंचमेश नीच राशि का हो और पंचम भाव को न देखता हो और पंचम में शनि-बुध हो तो स्त्री काकवंध्या होती है॥७९॥ भाग्येशो मूर्तिवर्ती च सुतेशो नीचगो यदि। सुते केतुबुधौ स्यातां सुतं कष्टाद्विनिर्दिशेत्॥८०॥ भाग्येश लग्न में हो, पंचमेश अपनी नीच राशि में हो और पाँचवें भाव में केतु-बुध हों तो कष्ट से पुत्र होता है॥८०॥ षडादित्रयसंस्थोऽपि नीचो वाप्यरिसंस्थितः। पापाक्रान्ते सुतस्थाने पुत्रं कष्टाद्विनिर्दिशेत्॥८१॥ पंचमेश ६।८।१२ में हो अथवा नीच में शत्रु की राशि में हो और पंचम भाव में पापग्रह हो तो कष्ट से पुत्र होता है॥८१॥ दत्तकपुत्रयोगः- पुत्रस्थाने बुधक्षेत्रे मन्दक्षेत्रेऽथवा पुनः। मन्दमान्दियुते दृष्टे तदा दत्तादयः सुताः॥८२॥