भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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१८४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् व्ययस्थानगते सौम्ये तदीशे स्वोच्चराशिगे। शुभयुक्ते शुभैर्दृष्टे मोक्षः स्यान्नात्र संशयः।।२४३।। बारहवें भाव में बुध हो, व्ययेश अपनी उच्च राशि में हो, शुभ ग्रह से युत और दृष्ट हो तो मोक्ष होता है।।२४३।। व्ययेशे पापसंयुक्ते व्यये पापसमन्विते। पापग्रहेण सन्दृष्टे देशाद्देशान्तरं गतः।।२४३।। व्ययेश पापग्रह से युत हो और व्ययभाव में पापग्रह हो और पापग्रह से देखा जाता हो तो देश-विदेश में जाने वाला होता है।।२४४।। व्ययेशे शुभराशिस्थे व्ययर्क्षे शुभसंयुते। शुभग्रहेण सन्दृष्टे स्वदेशात्सञ्चरो भवेत्।।२४५।। व्ययेश शुभराशि में हो और व्ययभाव में शुभग्रह हो, शुभग्रह से देखा जाता हो तो अपने देश से अन्य देश को जाने वाला होता है।।२४५।। व्यये मन्दादिसंयुक्ते भूमिजेन समन्विते। शुभदृष्टैर्न सम्प्राप्तिः पापमूलाद्धनार्जनम् ।।२४६।। व्ययभाव शनि-भौम से युत हो, शुभग्रह से न देखा जाता हो तो पाप करने से धन की हानि होती है।।२४७।। लग्नेशे व्ययराशिस्थे व्ययेशे लग्नसंयुते। भृगुपुत्रेण संयुक्ते धर्ममूलाद्धनव्ययम्।।२४७।। लग्नेश बारहवें भाव में हो और व्ययेश लग्न में हो, शुक्र से युत हो तो धर्म करने में धन का व्यय होता है।।२४७।। इति पाराशरहोरायां पूर्वखण्डे सुबोधिन्यां द्वादशभावविचारो नाम द्वादशोऽध्यायः। अथ भावेशफलाध्यायः अथ लग्नेशभावफलम्- लग्नेशे लग्नगे पुंसः सुखी भुजपराक्रमी। मनस्वी चातिचाञ्चल्यो द्विभार्यः परगोऽपि वा।।१।। लग्नेश लग्न में हो तो जातक सुखी, पराक्रमी, मनस्वी, अत्यंत चंचल, दो स्त्रियों वाला और परस्त्रीगामी भी होता है।।१।। लग्नेशे धनगे लाभे सलाभः पण्डितो नरः। सुशीलो धर्मविन्मानी बहुदारगुणैर्युतः।।२।।