भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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२२ - बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् जीवांशनिःसृतास्तेषां तेभ्यो जाता नरादयः। तेऽपि तथैव लीयन्ते तेऽव्यक्ते समयान्ति हि।।३२।। उन्हीं (सूर्यादिग्रहों) में से जीवांश के निकलने से मनुष्य आदि जीवों की सृष्टि होती हैं वे भी इहलोक में अपने-अपने कार्यों को करके अन्त में उन्हीं में लीन हो जाते हैं। ये ग्रह भी प्रलय के समय अव्यक्त परमात्मा में लीन हो जाते हैं।।३२।। इदं ते कथितं विप्र स यस्मिन् वै भवेदिति । भूतान्यपि भविष्यन्ति तत्तत्सर्वज्ञतामियात् ।। ३३ ।। हे विप्र ! इस प्रकार से मैंने सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय जैसे होती है, हुई है और होगी उन सभी को तुम से कहा। इन सबको वही सर्वज्ञ (परमात्मांश पुरुष) ही जानता है।।३३।। विना तज्ज्योतिषं नान्यो ज्ञातुं शक्नोति कर्हिचित् । तस्मादवश्यमध्येयं ब्राह्मणैश्च विशेषतः।।३४।। इन सभी बातों को बिना ज्योतिषशास्त्र के कोई कभी भी नहीं जान सकता है। इसलिये इस शास्त्र का अध्ययन अवश्य करना चाहिए, विशेषकर ब्राह्मण को अवश्य करना चाहिए।।३४।। यो नरः शास्त्रमज्ञात्वा ज्योतिषं खलु निन्दति । रौरवं नरकं भुक्त्वा चान्धत्वं चान्यजन्मनि ।। ३५ ।। इति बृहत्पाराशरहोरायां पूर्वखंडे सृष्ट्यादिक्रमशास्त्रावतरणं नाम प्रथमोऽध्यायः ।।१।। जो मनुष्य इस शास्त्र को न जानते हुए ज्योतिषशास्त्र की निन्दा करता है, वह रौरवं नरक को भोगकर दूसरे जन्म में अन्धा होता है।।३५।। इति पाराशरहोरायां सुबोधिन्यां प्रथमोऽध्यायः ।।१।। अथ राशिप्रभेदाध्यायः मैत्रेय उवाच- यदव्यक्तात्मको विष्णुः कालरूपो जनार्दनः। तस्याङ्गानि निबोध त्वं क्रमान्मेषादि राशयः ।। १ ।। मैत्रेय जी बोले- जो व्यक्त (प्रकट रूप) विष्णु काल (समय) रूपी जनार्दन हैं, उनके अंगों का ज्ञान क्रम से मेषादि राशियों द्वारा बताइये ।। १ ।।