बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसृष्ट्यादिक्रमः २१ पराशर जी बोले- हे विप्र! राम, कृष्ण, नृसिंह और शूकर ये पूर्ण अवतार हैं। अन्य अवतार जीवांश से युक्त हैं।। २४ ।। अवताराण्यनेकानि ह्यजस्य परमात्मनः। जीवानां कर्मफलदो ग्रहरूपी जनार्दनः।। २५ ।। अजन्मा परमात्मा के अनेक अवतार हैं। जीवों के कर्मानुसार फल देने के लिए ग्रहरूप जनार्दन भगवान् का अवतार है।। २५ ।। दैत्यानां बलनाशाय देवानां बलवृद्धये। धर्मसंस्थापनार्थाय ग्रहाज्जाताः शुभाः क्रमात् ।। २६ ।। दैत्यों के बल को नाश करने के लिए और देवताओं का बल बढ़ाने के लिये तथा धर्म को स्थापित करने के लिये ग्रहों से शुभद अवतार हुए हैं।। २६ ।। रामोऽवतारः सूर्यस्य चन्द्रस्य यदुनायकः। नृसिंहो भूमिपुत्रस्य बुद्धः सोमसुतस्य च।। २७ ।। जैसे सूर्य का रामावतार, चन्द्रमा का कृष्णावतार, भौम का नृसिंहावतार और बुध का बौद्धावतार है।। २७ ।। वामनो विबुधेज्यस्य भार्गवो भार्गवस्य च। कूर्मो भास्करपुत्रस्य सैंहिकेयस्य सूकरः।। २८ ।। बृहस्पति का वामन अवतार, शुक्र का भार्गव (परशुराम) अवतार, शनि का कूर्म अवतार, राहु का सूकर अवतार है।।२८।। केतोर्मीनावतारश्च ये चान्ये तेऽपि खेटजाः। परमात्मांशमधिकं येषु ते च वै खेचराभिधाः।। २९ ।। केतु का मत्स्यावतार हुआ है, अन्य अवतार भी ग्रहों से ही हुए हैं। जिनमें परमात्मांश अधिक है वे खेचर यानि देव कहे जाते हैं।। २९ ।। जीवांशमधिकं येषु जीवास्ते वै प्रकीर्त्तिताः। सूर्यादिभ्यो ग्रहेभ्यश्च परमात्मांशनिःसृताः ।। ३० ।। रामकृष्णादयः सर्वे ह्यवतारा भवन्ति वै। तत्रैव ते विलीयन्ते पुनः कार्यान्तरे सदा ।। ३१ ।। जिनमें जीवांश अधिक हैं वे जीव कहे जाते हैं। सूर्य आदि ग्रहों से परमात्मांश निकल कर ही राम, कृष्ण आदि अवतार हुए हैं। वे अपने- अपने कार्यों को करके पुनः उन्हीं में लीन हो जाते हैं।। ३०-३१ ।।