बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् श्री शक्ति से युक्त होकर विष्णु (वासुदेव) तीनों लोकों का पालन करते हैं, भू शक्ति से (विष्णु) ब्रह्मा जगत् की सृष्टि करते हैं और नील शक्तिसम्पन्न शिव तीनों लोकों का लय करते हैं ।।१८।। सर्वेषु चैव जीवेषु परमात्मा विराजते । सर्वं हि तदिदं ब्रह्मन् स्थितं हि परमात्मनि ।।१९।। हे ब्रह्मन् ! सभी जीवों में परमात्मा स्थित हैं और यह समस्त जगत् परमात्मा में स्थित है ।।१९।। सर्वेषु चैव जीवेषु स्थितं ह्यंशद्वयं क्वचित् । जीवांशमधिकं तद्वैत्परमात्मांशकः किल ।।२०।। सभी जीवों में दो अंश अधिक होते हैं, किसी में जीवांश अधिक होता है और किसी में परमात्मांश अधिक होता है ।।२०।। सूर्यादयो ग्रहाः सर्वे ब्रह्मकामद्विषादयः । एते चान्ये च बहवः परमात्मांशकाधिकाः ।।२१।। सूर्यादि ग्रहों में, ब्रह्मा, शिव आदि देवता तथा अन्य अवतारों में परमात्मांश अधिक होता हैं ।।२१।। शक्तयश्च तथैतेषामधिकांशाः श्रियादयः । अन्यासु स्वस्वशक्तीषु ज्ञेया जीवांशकाधिकाः ।।२२।। इनकी जो शक्तियाँ (लक्ष्मी आदि) हैं इनमें भी परमात्मांश अधिक होता है। अन्य देवता और उनकी शक्तियों में जीवांश अधिक होता 'है।।२२।। अवतारवादः । पराशर जी के उत्तर से शंकित हो मैत्रेय जी ने पुनः प्रश्न किया। मैत्रेय उवाच- रामकृष्णादयो ये च ह्यवतारा रमापतेः । तेऽपि जीवांशसंयुक्ताः किं वा ब्रूहि मुनीश्वर ।।२३।। मैत्रेय जी बोले- हे मुनीश्वर ! राम, कृष्ण आदि जो विष्णु के अवतार हैं क्या वे भी जीवांश से युक्त हैं ।।२३।। पराशर उवाच- रामः कृष्णश्च भो विप्र नृसिंहः शूकरस्तथा । इति पूर्णावतारश्च ह्यन्ये जीवांशकान्विताः ।।२४।।