बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसृष्ट्यादिक्रमः १९ व्यक्त आत्मावाले विष्णु तीन शक्तियों से युक्त होने से अनन्त शक्तिवाले कहे जाते हैं। तीनों शक्तियों में श्री शक्ति सत्त्वगुण प्रधान, भू शक्ति रजोगुण प्रधान है।।११।। शक्तिस्तृतीया प्रोक्ता नीलाख्या ध्वान्तरूपिणी। वासुदेवश्चतुर्थोऽभूच्छ्रीशक्त्या प्रेरितो यदा।।१२।। तीसरी नील शक्ति तमोगुण प्रधान है। इनसे भिन्न श्रीशक्ति से प्रेरित चौथे वासुदेव हैं।।१२।। सङ्कर्षणश्च प्रद्युम्नोऽनिरुद्ध इति मूर्त्तिधृक्। तमःशक्त्यान्वितो विष्णुर्देवः सङ्कर्षणाभिधः।।१३।। वे संकर्षण, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध नामक मूर्ति को धारण करते हैं, तमः शक्ति से युक्त विष्णु संकर्षण नाम से।।१३।। प्रद्युम्नो रजसा शक्त्याऽनिरुद्धः सत्त्वया युतः। महान्सङ्कर्षणाज्जातः प्रद्युम्नादहंकृतिः।।१४।। रज शक्ति से प्रद्युम्न, सत्त्व शक्ति से युक्त अनिरुद्ध होते हैं। संकर्षण से महत्तत्त्व की उत्पत्ति और प्रद्युम्न से अहंकार की उत्पत्ति हुई।।१४।। अहङ्कारात्स्वयं जातो ब्रह्माहङ्कारमूर्त्तिधृक्। सर्वेषु सर्वशक्तिश्च स्वशक्त्याधिकया युतः।।१५।। अहंकार से अहंकार की मूर्त्ति को धारण किये हुए ब्रह्मा हुए। सभी लोगों में सभी शक्तियाँ हैं किन्तु जिस शक्ति से जो उत्पन्न हुए हैं वह शक्ति उनमें अधिक है।।१५।। अहङ्कारस्त्रिधा भूत्वा सर्वमेतद्विस्तराद्। सात्त्विको राजसश्चैव तामसश्चेदहंकृतिः।।१६।। अहंकार भी सात्त्विक, राजस, तामस क्रम से वैकारिक, तैजस और तामस नाम से तीन प्रकार के हैं।।१६।। देवा वैकारिकाज्जातास्तैजसादिन्द्रियाणि च। तामसाश्चैव भूतानि खादीनि स्वशक्तिभिः।।१७।। वैकारिक से देवता, तैजस से इन्द्रिय और तामस से पंचमहाभूतों की उत्पत्ति हुई है। ये सभी अपनी-अपनी शक्ति से उत्पन्न हैं।।१७।। श्रीशक्त्या सहितो विष्णुः सदापाति जगत्त्रयम्। भूशक्त्या सृजते विष्णुर्नीलशक्त्या युतोऽत्ति हि।।१८।।