बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनाभसादियोगाध्यायः २०३ वज्रयोगफलम्- आद्यन्तवयः सुखिनः शूराः सुभगा निरीहाश्च । भाग्यविहीना वज्रे जाता खला विरुद्धाश्च ॥२७॥ वज्र योग में उत्पन्न पुरुष आदि और अंत अर्थात् बाल्य और वृद्ध अवस्था में सुखी, शूर, सुंदर, निर्दय और भाग्यहीन होते हैं ॥२७॥ यवयोगफलम्- व्रतनियममङ्गलपरा वयसो मध्ये सुखार्थपुत्रयुताः । दातारः स्थिरचित्ता यवयोगभवाः सदा पुरुषाः ॥२८॥ यव योग में उत्पन्न पुरुष व्रत, नियम, मंगल को करने वाले, आयुष्य के मध्य में सुख, धन, पुत्र से युक्त, दाता और स्थिरचित्त होते हैं ॥२८॥ कमलयोगफलम्- विभवगुणाढ्याः पुरुषाः स्थिरायुषो विपुलकीर्तयः शुद्धाः । शुभशतकाः पृथ्वीशाः कमलभवा मानवा नित्यम् ॥२९॥ कमल योग में उत्पन्न पुरुष धन-ऐश्वर्य एवं गुणों से युक्त, दीर्घायु, अत्यंत कीर्तिमान्, सैकड़ों शुभ कार्य करने वाले राजा होते हैं ॥२९॥ वापीयोगफलम्- निधिकरणे निपुणधियः स्थिरार्थसुखसंयुताः सुतयुताश्च । नयनसुखसम्पहृष्टा वापीयोगेन राजानः ॥३०॥ वापी योग में उत्पन्न पुरुष धनसंग्रह में चतुर, स्थिर धन और संपत्ति से युक्त, पुत्रवान्, नेत्र को सुख देने वाले पदार्थों से युक्त राजा होते हैं ॥३०॥ यूपयोगफलम्- आत्मविदिज्यानिरतः स्त्रिया युतः सत्त्वसम्पन्नः । व्रतयमनियमे निरतो यूपे जातो विशिष्टश्च ॥३१॥ यूपयोग मे उत्पन्न पुरुष ज्ञानी, यज्ञकर्ता, स्त्री से युत, सत्त्वयुक्त, व्रत-नियम में संपृक्त और विशिष्ट व्यक्ति होता है ॥३१॥ शरयोगफलम्- इषुकरणे च समर्था मृगयाधनसेविताश्च मांसादाः । हिंस्राः कुशिल्पकराः शरयोगे मानवाः प्रसूयन्ते ॥३२॥