बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् सर्पयोगफलम्- विषमाः क्रूरा निःस्वा नित्यं दुःखार्दिताः सुदीनाश्च। परभक्षपानविरताः सर्पप्रभवा भवन्ति नराः॥२१॥ सर्प योग में उत्पन्न पुरुष कुटिल, क्रूर, निर्धन, नित्य दुःखी, दीन और दूसरे भक्ष्य भोज्य से विरत रहने वाला होता है।।२१।। गदायोगफलम्- सततोद्युक्तार्थवंशा यज्वानः शास्त्रगेयकुशलाश्च। धनकनकरत्नसम्पत्संयुक्ता मानवा गदायां तु।।२२।। गदा योग में उत्पन्न पुरुष निरंतर धन के लिए उद्योगी, यज्ञ करने वाले, शास्त्र और संगीत में कुशल, धन, सुवर्ण, रत्न से युक्त होते हैं।।२२।। शकटयोगफलम्- रोगार्ताः कुनखा मूर्खाः शकटानुजीविनो निःस्वाः। मित्रस्वजनविहीनाः शकटे जाता भवन्ति नराः॥२३॥ शकट योग में उत्पन्न पुरुष रोगी, कुनखी, मूर्ख, गाड़ी से जीविका चलाने वाले और मित्र तथा स्वजनों से हीन होते हैं।।२३।। विहगयोगफलम्- भ्रमणरुचयो विकृष्टा दूताः सुरतानुजीविनो धृष्टाः। कलहप्रियाश्च नित्यं विहगे योगे सदा जाताः ।।२४।। विहग 'पक्षी' योग में उत्पन्न पुरुष भ्रमणशील, परतंत्र, दूत, सुरत से जीविका वाले, ढीठ और झगड़ालू होते हैं।।२४।। शृङ्गाटकयोगफलम्- प्रियकलहाः समरसहाः सुखिनो नृपतेः प्रियाः शुभकलत्राः। आढ्या युवतिद्वेष्याः शृङ्गाटकसम्भवा मनुजाः ।।२५।। शृंगाटक योग में उत्पन्न पुरुष कलहप्रिय, झगड़ालू, सुखी, राजा के प्रिय, सुंदर स्त्रियों से युक्त और स्त्री के द्वेषी होते हैं।।२५।। हलयोगफलम्- बह्वाशिनो दरिद्राः कृषीवला दुःखिताश्च सोद्वेगाः। बन्धुसुहृद्भिः सक्ताः प्रेष्या हलसंज्ञके सदा पुरुषाः ।।२६।। हल योग में उत्पन्न पुरुष बहुभोजी, दरिद्र, कृषि करने वाले, दुःखी, उद्वेग से युक्त, बंधु तथा मित्रों में आसक्त और दास होते हैं।।२६।।