भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 199, कुल 800 में से

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नाभसादियोगाध्यायः २०१ ये योगाः कथिताः पुरा बहुतरास्तेषामभावे भवेद् गोलश्चैकगतैर्युगं द्विगृहगैः शूलस्त्रिगेहोपगैः। केदारश्च चतुर्गृहगतैर्ग्रहैः पाशस्तु पञ्चस्थितैः षट्स्थैर्दामनिका च सप्तगृहगैर्वीणेति संख्या इमे ।।१६।। पूर्वोक्त योगों के अभाव में निम्नलिखित योग होते हैं। यदि सभी ग्रह एक ही राशि में हों तो 'गोल' योग, दो भावों में हों तो 'युग', तीन गृहों में हों तो 'शूल' योग, चार भावों में हों तो 'केदार' योग, पाँच राशियों में सभी ग्रह हों तो 'पाश' योग, ६ राशियों में हों तो 'दामिनी' योग और सभी ग्रह ७ राशियों में हों तो 'वीणा' नामक योग होता है।।१६।। रज्जुयोगफलम्- अटनप्रियाः सुरूपाः परदेशस्वास्थ्यभागिनो मनुजाः । क्रूरा खलस्वभावा रज्जुप्रभवाः सदा कथिताः ।।१७।। रज्जु योग में उत्पन्न पुरुष भ्रमणशील, स्वरूपवान्, परदेश में स्वस्थ रहनेवाला, क्रूर और खल स्वभाव का होता है।।१७।। मुसलयोगफलम्- मानज्ञानधनैश्वर्यैर्युक्ता नृपप्रियाः ख्याताः । बहुपुत्राः स्थिरचित्ता मुसलसमुत्था भवन्ति नराः ।।१८।। मुसल योग में उत्पन्न पुरुष मान, ज्ञान, धन, ऐश्वर्य से युक्त, राजा का प्रिय, प्रसिद्ध, अनेक पुत्रों वाला और स्थिरचित्त होता है।।१८।। नलयोगफलम्- न्यूनातिरिक्तदेहा धनसञ्चयभागिनोऽतिनिपुणाश्च । बन्धुहिताश्च सुरूपा नलयोगे सम्प्रसूयन्ते ।।१९।। नलयोग में उत्पन्न पुरुष हीन और अधिक अंगों वाला, धनसंचय करने वाला, अत्यंत चतुर, बंधुओं का हितैषी और सुरूप होता है।।१९।। मालायोगफलम्- नित्यं सुखप्रधाना वाहनवस्त्रान्नभोगसम्पन्नाः । कान्ताः सुबहुस्त्रीका मालायां सम्प्रसूताः स्युः ।।२०।। माला योग में उत्पन्न पुरुष नित्य सुखी, वाहन, वस्त्र-अन्नभोग से संपन्न, सुंदर शरीर, अनेक स्त्रियों से युक्त होता है।।२०।।