भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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नाभसादियोगाध्यायः २०५ चापयोगफलम्- आनृतिकगुप्तपालाश्चौराः कितवाश्च कानने निरताः। कार्मुकयोगे जाता भाग्यविहीनाः शुभा वयोमध्ये ॥३८॥ चापयोग में उत्पन्न पुरुष झूठ बोलने वाले, जेलखाने के मालिक, चोर, धूर्त्त, जंगल के प्रेमी, भाग्यहीन और अवस्था के मध्य में सुखी होते हैं॥३८॥ अर्धचन्द्रयोगफलम्- सेनापतयः सर्वे कान्तशरीरा नृपप्रिया बलिनः। मणिकनकभूषणयुता भवन्ति योगे वार्थचन्द्राख्ये ॥३९॥ अर्धचन्द्रयोग में उत्पन्न होने वाले सभी पुरुष सुंदर शरीर के, सेनापति, राजा के प्रिय, बली, मणि, सुवर्ण और आभूषणों से युक्त होते हैं॥३९॥ चक्रयोगफलम्- प्रणताशेषनराधिपकिरीटरत्नप्रभास्फुरितपादः। भवति नरेन्द्रो मनुजश्चक्रे यो जायते योगे ॥४०॥ चक्र योग में उत्पन्न पुरुष अनेक राजाओं के रत्नजटित मुकुटों से नमस्कार किये जाने वाला राजा होता है॥४०॥ समुद्रयोगफलम्- बहुरत्नधनसमृद्धा भोगयुता धनजनप्रियाः ससुताः। उदधिसमुत्थाः पुरुषाः स्थिरविभवाः साधुशीलाश्च ॥४१॥ समुद्रयोग में उत्पन्न पुरुष अनेक रत्न एवं धन से समृद्ध, भोगयुक्त, ज़नप्रिय, पुत्रवान्, स्थिर धनवाले और सज्जन होते हैं॥४१॥ वीणायोगफलम्- प्रियगीतनृत्यवाद्यनिपुणाः सुखिनश्च धनवन्तः। नेतारो बहुभृत्या वीणायां कीर्त्तिताः पुरुषाः ॥४२॥ वीणा योग में उत्पन्न पुरुष गीत, नाच और बाजा के प्रेमी, निपुण, सुखी, धनी, नेता, अनेक नौकरों वाले होते हैं॥४२॥ दामिनीयोगफलम्- दामिन्यामुपकारी नयधनयुक्तो महेश्वरः ख्यातः। बहुसुतरत्नसमृद्धो धीरो जायेत विद्वांश्च ॥४३॥