बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् दामिनी योग में उत्पन्न पुरुष नीति और धन से युक्त, प्रभु, प्रसिद्ध, अनेक पुत्र, रत्न से समृद्ध और धीर तथा पंडित होता है।।४३।। पाशयोगफलम्- पाशे बन्धनभाजः कार्ये दक्षाः प्रपञ्चकाराश्च। बहुभाषिणो विशीला बहुभृत्याः सम्प्रतानाश्च ।।४४।। पाश योग में उत्पन्न पुरुष बंधन को भोगने वाले, कार्य में चतुर, प्रपंची, बहुत बोलने वाले, दुःशील और अनेक नौकरों से युक्त तथा परिवार वाले होते हैं।।४४।। केदारयोगफलम्- सुबहूनामुपयोज्याः कृषीवलाः सत्यवादिनः सुखिनः। केदारे सम्भूताश्चलस्वभावा धनैर्युक्ताः।।४५।। केदार योग में उत्पन्न पुरुष बहुतों के उपकारी, कृषिकर्त्ता, सत्यवादी, सुखी, चंचल और धनी होते हैं।।४५।। शूलयोगफलम्- तीक्ष्णालसधनहीना हिंस्राः सुबहिष्कृता महाशूराः। संग्रामे लब्धयशस्काः शूले योगे भवन्ति नराः।।४६।। शूल योग में उत्पन्न पुरुष बड़े आलसी, निर्धन, हिंसक, जातिबहिष्कृत, शूरवीर, संग्राम में लब्धकीर्त्ति वाले होते हैं।।४६।। युगयोगफलम्- पाखण्डवादिनो वा धनरहिता वा बहिष्कृता लोके। सुतमातृधर्मरहिता युगयोगे ये नरा जाताः।।४७।। युग योग में उत्पन्न पुरुष पाखंडी, निर्धन, लोक में बहिष्कृत, पुत्र- माता के धर्म से हीन होते हैं।।४७।। गोलयोगफलम्- बलसंयुक्ता विधना विद्याविज्ञानवर्जिता मलिनाः। नित्यं दुःखितदीना गोले योगे भवन्ति नराः।।४८।। गोलयोग में उत्पन्न पुरुष बलवान्, निर्धन, विद्या से हीन, मलिन, हमेशा दुःखी और दीन होते हैं।।४८।। सर्वास्वपि दशास्वेते भवेयुः फलदायिनः। प्रा...मिति विज्ञेयाः प्रवदन्ति तवाग्रजाः।।४९।।