बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · अथ केमद्रुमयोगफलम्- सद्दित्तसूनुवनितातत्मजनैर्विहीनः प्रेष्यो भवेत्तु मनुजो हि विदेशवासी। नित्यं विरुद्धधिषणो मलिनः कुवेषः केमद्रुमे च मनुजाधिपतेः सुतोऽपि॥४७॥ केमद्रुम योग में उत्पन्न जातक धन, पुत्र, स्त्री, बंधु से हीन होता है, दास और परदेशी होता है, नित्य मलिन कुवेषधारी होता है; चाहे वह राजा का ही लड़का हो तो भी॥४७॥ अथ केमद्रुमभङ्गयोगः- प्रालेयांशुः सूतिकाले यदा वै सर्वैः खेटैर्वीक्ष्यमाणास्तदा वै। दीर्घायुष्यं राजयोगं मनुष्यं सत्कोशाढ्यं हन्ति केमद्रुमं च॥४८॥ यदि जन्म समय में चंद्रमा सभी ग्रहों से देखा जाता हो तो जातक के केमद्रुम योग के दुष्टफल का नाश कर दीर्घायु, धनी और राजा बनाता है॥४८॥ सर्वे खेटाः केन्द्रकोणेषु संस्था दुष्टो योगश्चापि केमद्रुमोऽयम्। दुष्टं सर्वं स्वं फलं संविहाय कुर्युः पुंसां सत्फलं वै विचित्रम्॥४९॥ यदि सभी ग्रह केन्द्र-कोण में हों तो यह दुष्ट केमद्रुम योग का नाश कर उसके दुष्ट फलों का भी नाश कर मनुष्य को शुभफल देते हैं॥४९॥ सर्वेषु चन्द्रयोगेषु चेदं यत्नाद्विचिन्तयेत्। केमद्रुमादिका योगाः सम्भवेऽस्य लयं ययुः॥५०॥ सभी चक्र योगों में इसका विशेष विचार करना चाहिए। क्योंकि सभी शुभ योगों के रहते यदि केमद्रुम योग हो तो उसका नाश होता है॥५०॥ · अथ रवियोगानांह- व्ययधनयुतखेटैर्वोशिवेशी दिनेशा- दुभयचरिकयोगश्चोभयस्थानसंस्थैः। निजगृहसुहृदुच्चस्थानयातैश्च जाता बहुधनसुखयुक्ता राजतुल्या भवन्ति॥५१॥ सूर्य से बारहवें ग्रह हो तो 'वोशि' योग, दूसरे भाव मे हो तो 'वेशि' योग और २/१२ दोनों भावों में ग्रह हों तो 'उभयचरिक' योग होता