भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 258

२६० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् आयुर्दायाध्यायः मैत्रेय उवाच– दरिद्रधनयोगौ च कथितौ प्राङ्‌महामुने ! । नराणामायुषो ज्ञानं कथं जातं महामुने ! ॥१॥ मैत्रेय ने कहा– हे मुने ! आपने दरिद्र और धन योग को कहा। हे महामुने ! मनुष्यों की आयु का ज्ञान कैसे होता है, इसे कहिए ॥१॥ पराशर उवाच– साधु पृष्टं त्वया विप्र ! नराणां हितकाम्यया । आयुर्ज्ञानं प्रवक्ष्यामि दुर्लभं यत् सुरैरपि ॥२॥ पराशरजी ने कहा– हे विप्र ! मनुष्यों के हित की कामना से तुमने बड़ा ही उत्तम प्रश्न किया है, अब मैं आयुष्य ज्ञान को कहता हूँ, जो कि देवताओं को भी दुर्लभ है ॥२॥ अंशायुसाधनम्– समाहता भांशकलाविलिप्ता गजाभ्रचन्द्रैर्गहपर्ययेभ्यः । विकर्त्तनैः संविहतावशेषेऽब्दमासाद्यस्त्रादिकमायुरेवम् ॥३॥ ग्रहों की राशि अंश, कला, विकला को १०८ से गुणा कर १२ से भाग देने से शेष वर्ष, मास, दिन, घटी आदि ग्रह की आयु होती है ॥३॥ होरादायोष्येवमत्राधिवीर्यं लग्नं चेद्राशितुल्यैस्तथाब्दकैः । युक्तं शेषं भागपूर्वद्विनिघ्नं बाणैर्भक्तं मासपूर्वैर्युतं तत् ॥४॥ इसी प्रकार लग्न की भी आयु होती है, किन्तु लग्न अधिक बली हो तो लग्न राशि के तुल्य वर्ष और शेष अंशादि को २ से गुणाकर ५ से भाग देने से मास आदि आयु होती है ॥४॥ अंशायुषि साधने विशेषः– नीचेऽस्तगेऽर्द्धमरिभे त्रिलवं हरन्ति नास्तङ्गतौ शनिसितौ व्ययतौऽत्र वामम् । सर्वार्धकत्रिकचतुर्थशरर्तुभागान् हरन्त्यशुभदाः शुभदास्तदर्धम् ॥५॥ यदि ग्रह अपनी नीचराशि में हो या अस्त हो तो आयु का आधा, शत्रु की राशि में हों तो आयु का तीसरा भाग कम आयु देता है। किन्तु शनि,