बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआयुर्दायाध्यायः २६७ शनि शत्रुराशि में है, शनि के आयु का तृतीय भाग १८।१६।३।४२।४० ÷ ३ = ६।५।९।१४।१३ को शन्यायु में घटाने से शेष १२।१०।२२।२८।२७ शनि की स्पष्टायु हुई। संस्कृतपिण्डायुचक्रम्—
| सू. | चं. | मं. | बु. | बृ. | शु. | श. | ल. | योग | ग्रहायु |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १० | २० | २७ | १० | ६ | १७ | १२ | ४ | ११२ | वर्ष |
| १८ | १८ | ११ | ९ | ८ | ० | १० | ७ | ३ | मास |
| १ | २२ | १३ | १० | १८ | १० | २२ | २९ | ८ | दिन |
| १९ | १० | ५६ | ३५ | ८ | ५५ | २८ | ७ | ३३ | घटी |
| ३० | २५ | ० | ४८ | १५ | १५ | २७ | ४८ | २८ | पल |
निसर्गायु में विशेष— सूर्य सातवें भाव में है, अतः नैसर्गिक सूर्यायु का छठा भाग घटाने से स्पष्ट सूर्यायु नैसर्गिक वर्षादि ९।७।१।६।१५ हुई। चन्द्र में कोई हानि-वृद्धि नहीं हुई। भौम अपने नवांश में है, अतः भौम की आयु दूनी हुई = २।२०।२१।५१।४८ बुध में कोई हानि-वृद्धि नहीं हुई। गुरु आठवें भाव में है, अतः गुरु के आयु का आधा भाग घटाना चाहिए और अपने द्रेष्काण में है अतः दूना करना चाहिए। इसलिए गुरु की आयु ज्यों की त्यों रही। शुक्र की आयु में कोई संस्कार नहीं है। शनि शत्रु राशि में है, अतः शन्यायु का तीसरा भाग उसमें घटाने से शनि की आयु = ८।७।४।५८।५८ हुई। संस्कृतनिसर्गायुचक्रम्—
| सू. | चं. | मं. | बु. | बृ. | शु. | श. | ल. | योग | ग्रहायु |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ९ | ० | २ | ८ | १५ | १५ | ८ | ४ | ६७ | वर्ष |
| ७ | १० | २० | १ | १३ | १४ | ७ | ७ | ११ | मास |
| ३२ | १० | २१ | ० | ११ | १८ | ४ | २९ | १० | दिन |
| २८ | २९ | ५५ | २० | ४३ | ५८ | ५८ | ७ | ३ | घटी |
| १५ | १३ | ४८ | ५१ | ४८ | २० | ५८ | ४८ | १ | पल |