बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 270, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ें२७२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् यदि ३ प्रकार से दीर्घायु आये तो ४० वर्ष का खंड और दो प्रकार से दीर्घायु हो तो ३६ वर्ष का ॥३५॥ योगैकेन सदा ग्राह्यं द्वात्रिंशन्मिताब्दकम्। एवमल्पायुयोगे तु प्रोक्ताच्च विपरीतकम्॥३६॥ और एक प्रकार से दीर्घायु हो तो ३२ वर्ष का खंड लेना चाहिए। इसी प्रकार अल्पायु योग में इसके विपरीत यानि ३ प्रकार से अल्पायु हो तो ३२ वर्ष, दो प्रकार से अल्पायु हो तो ३६ और एक प्रकार से अल्पायु हो तो ४० वर्ष का खंड स्पष्टायु साधन में लेना चाहिए॥३६॥ तथा लग्नेशाष्टमेशाभ्यां मध्यमायुः समागते। ग्राह्यं चत्वारिंशन्मितं वर्षं च द्विजसत्तम॥३७॥ इसी प्रकार लग्नेश, अष्टमेश से मध्यमायु हो तो ४० वर्ष॥३७॥ लग्नेन्दुना वा चन्द्रमन्दाभ्यां मध्यायुः समागते। खण्डं ग्राह्यं तदा विद्वन् षट्त्रिंशन्मिताब्दकम्॥३८॥ लग्नचन्द्र वा शनिचन्द्र से मध्यमायु हो तो ३६ वर्ष॥३८॥ होरालग्नलग्नाभ्यां मध्यमायुः समागते। ग्राह्यं तत्र सदा विप्र द्वात्रिंशन्मिताब्दकम्॥३९॥ और होरालग्न, जन्मलग्न से मध्यमायु हो तो ३२ वर्ष का खंड लेना चाहिए॥३९॥ अथायुर्बोधकचक्रम्—
| दीर्घायुः<br>चरे लग्नेशः<br>चरेऽष्टमेशः | दीर्घायुः<br>स्थिरे लग्नेशः<br>द्विस्वभावेऽष्टमेशः | दीर्घायुः<br>द्विस्वभावे लग्नेशः<br>स्थिरेऽष्टमेशः |
|---|---|---|
| मध्यायुः<br>चरे लग्नेशः<br>स्थिरेऽष्टमेशः | मध्यायुः<br>स्थिरे लग्नेशः<br>चरेऽष्टमेशः | मध्यायुः<br>द्विस्वभावे लग्नेशः<br>द्विस्वभावेऽष्टमेशः |
| हीनायुः<br>चरे लग्नेशः<br>द्विस्वभावेऽष्टमेशः | हीनायुः<br>स्थिरे लग्नेशः<br>स्थिरेऽष्टमेशः | हीनायुः<br>द्विस्वभावे लग्नेशः<br>चरेऽष्टमेशः |