बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
DevanagariHindipublished800 पृष्ठ
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आयुर्दायाध्यायः २७३ अथायुष्खण्डबोधकचक्रम्—
| आयुः | प्रकारत्रयेण | खण्डम् | वर्षम् |
|---|---|---|---|
| प्रकारत्रयेण | १ | १२० | |
| दीर्घायुः | प्रकारद्वयेन | २ | १०८ |
| प्रकारैकेन | ३ | ९६ | |
| प्रकारत्रयेण | १ | ८० | |
| मध्यायुः | प्रकारद्वयेन | २ | ७२ |
| प्रकारैकेन | ३ | ६४ | |
| प्रकारत्रयेण | १ | ४० | |
| अल्पायुः | प्रकारद्वयेन | २ | ३६ |
| प्रकारैकेन | ३ | ३२ | |
| अथ स्पष्टायुःसाधनप्रकारः— | |||
| योगकारकखेटानां राशीन्त्यक्त्वांशकस्य च। | |||
| योगं कृत्वा भजेत्तत्र योगकारकसंख्यया॥४०॥ | |||
| योगकारक ग्रहों की राशियों को छोड़कर शेष अंशादिकों का योग करके | |||
| योगकारक ग्रहों की संख्या (१,२,३ आदि) से भाग देवे॥४०॥ | |||
| लब्धघ्नं प्राप्तखण्डेन त्रिंशता तु विभाजितम्। | |||
| लब्धं वर्षादिकं यच्च प्राप्तखण्डे तु शोधयेत्॥४१॥ | |||
| भाग देने से लब्धि को आयु के अनुसार अल्पायु के प्राप्त खंड से | |||
| गुणाकर गुणन फल में ३० का भाग देने से लब्ध वर्षादि को दीर्घायु वा | |||
| मध्यायु के प्राप्त खंडों में घटादे॥४१॥ | |||
| शेषं वर्षादिकमत्र स्पष्टायुः परिकीर्त्तितम्। | |||
| एवं स्पष्टक्रिया प्रोक्ता ब्रह्मणा शङ्करादिभिः॥४२॥ | |||
| उदाहरण— पृ.२५ के जन्माङ्गचक्र और आयुर्बोधक चक्र पृ. २५६ के | |||
| अनुसार— | |||
| लग्नेश शनि स्थिर (८) में } मध्यायु | |||
| अष्टमेश सूर्य चर (४) में } | |||
| शनि स्थिर (८) में } दीर्घायु | |||
| चन्द्र द्विस्वभाव (३) में } |