बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 272, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ें·२७४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् होरालग्न पृ. (२४) स्थिर (२) में } मध्यायु जन्मलग्न चर (१०) में } पृ. २५५ श्लोक ३३ के अनुसार दो प्रकार से मध्यायु तथा आयुखण्ड- बोधक चक्र (पृ. २५७) के अनुसार मध्यायु का दूसरा खण्ड (७२) वर्ष प्राप्त हुआ। लग्नेश शनि १।४८।५।२ } योगकर्ता ४ हैं अतः चारों अष्टमेश सूर्य १८।२६।३४ } के अंशादि का योग होरा लग्न १५।०।० } किया गया है। जन्म लग्न १५।२३।३७ } ५०।३८।३ ÷ ४ : = १२।३९।३०।४५ अंशादि १२।३९।३०।४५ × ३६ (द्वितीय खण्ड पृ. २५७) ३०) ४५५।४२।२७।० (१५ (वर्ष) ३० १५५ १५० ५ × १२ ६० ४२ १०२ (३ (मास) ९० १२ × ३० ३६० २७ ३८७ (१२ (दिन) ३० ८७ ६० २७ × ६० | लब्धि वर्षादि = १५।३।१२।५४।० १६२० ० १६२० (५४ (घटी) १५० १२० १२० x मध्यायु द्वितीय खण्ड वर्षादि ७२।०।०।०।० में लब्धि वर्षादि = १५।३।१२।५४।० घटाने से स्पष्टायुर्वर्षादि = ५६।८।१७।६।०