भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 28, कुल 800 में से

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पृष्ठ 28

३० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् कटुलवणतिक्तमिश्रमधुरोकषायकाः । क्रमेण सर्वे विज्ञेया सूर्यादीनां द्विजोत्तम ।।२३।। सूर्य आदि ग्रहों के क्रम से कटु, लवण, तीता मिश्रित, मधुर, खट्टा, और कसैला ये रस हैं।।२३।। बुधेज्यौ बलिनौ पूर्वे रविभौमौ च दक्षिणे। वारुणे सूर्यपुत्रश्च सितचन्द्रौ तथोत्तरे ।।२४।। बुध-गुरु पूर्वदिशा (लग्न में) में, सूर्य-भौम दक्षिण दिशा (दशम) में, शनि पश्चिम (सप्तम) में, शुक्र-चन्द्रमा उत्तर (चतुर्थ) में बली होते हैं।।२४।। निशायां बलिनश्चन्द्रकुजसौरा भवन्ति हि । सर्वदा ज्ञो बली ज्ञेयो दिनशेषा द्विजोत्तम ।।२५।। चन्द्रमा, भौम, शनि ये रात में बली, बुध दिन-रात्रि दोनों में और शेष सूर्य, गुरु, शुक्र दिन में बली होते हैं।।२५।। कृष्णे च बलिनः क्रूराः सौम्याः वीर्ययुताः सिते। सौम्यायने सौम्यखेटो बली याम्यायनेऽपरः ।।२६।। कृष्णपक्ष में पापग्रह और शुक्लपक्ष में शुभग्रह बली होते हैं। उत्तरायण में शुभग्रह और दक्षिणायन में पापग्रह बली होते हैं।।२६।। स्वदिवससमहोरामासपैः कालवीर्यकम् । शकुवुगुशुचराद्या वृद्धितो वीर्यवन्तराः ।।२७।। जो ग्रह जिस दिन का, वर्ष का, होरा का और मास का स्वामी होता है वह अपने दिन, वर्ष, होरा, मास में बली होता है। शनि, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, चंद्र और सूर्य यथोत्तर बली होते हैं। अर्थात् शनि से भौम, भौम से बुध, बुध से गुरु, गुरु से शुक्र, शुक्र से चन्द्रमा और चन्द्र से सूर्य बली होता है।।२७।। स्थूलान् जनयति सूर्यो दुर्भगान् सूर्यपुत्रकः । क्षीरोपेतांस्तथा चन्द्रः कण्टकाद्यान्धरासुतः ।।२८।। स्थूल वृक्षों का कारक सूर्य है, दुष्ट वृक्षों का कारक शनि, दूधवाले वृक्षों का चन्द्रमा, काँटेवाले वृक्षों का भौम है।।२८।। गुरुज्ञौ सफलान्विप्र पुष्पवृक्षान्भृगोः सुतः । नीरसान्सूर्यपुत्रश्च एवं ज्ञेया खगाः द्विज ।।२९।।