भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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३१८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् कहना चाहिए। (इसका विस्तृत विवरण उत्तरार्ध में देखना चाहिए)।।१।। अथ रवेरष्टकवर्गः- स्वारार्किभ्यो दिनेशः स्वसुखमृतितपःखास्तलाभाद्ययातः शुक्रादस्तारिरिष्फे अरितनयतपोलाभवर्त्तीसुरेज्यात्। चन्द्राल्लाभारिकर्मत्रिषु शशितनयात्सान्त्यधर्मात्मजेषु प्रोक्तो लग्नाद्व्ययाम्बूपचयगृहगतः सुप्रशस्तोऽष्टवर्गात्।।२।। अपने स्थान से तथा भौम और शनि से १,२,४,८,९,१०,७ और ११ इन स्थानों में सूर्य शुभफलदायक होता है। शुक्र से ७,६,१२ स्थानों में, गुरु से ६,५,९,११ स्थानों में, चन्द्रमा से ११,६,१०,३, स्थानों में, बुध से पूर्वोक्त स्थानों (११।६।३।१०) के साथ ११,९ स्थानों में और जन्मलग्न से १२,४,३,६,१०,११ स्थानों में शुभफल देता है अर्थात् रेखाप्रद होता है।।२।। रवेरष्टकवर्गाङ्काः

सू.चं.मं.बु.बृ.शु.श.ल.
१०१२
१११११०
१०११
१११२
१०१०१२१०
११११११
अथ चन्द्राष्टकवर्गः-
इन्दुल्लग्नात्षडायत्रिदशषु कुसुतात्सस्वधर्मात्मजेषु
स्वात्सास्ताद्येषु सूर्यात्समदनमृतिषु त्र्यायधीषट्सुमन्दात्।
ज्ञात्केन्द्रात्मजाष्टत्रिषु विबुधगुरोः केन्द्ररन्ध्रान्त्यलाभे
शुक्राद्धीधर्मबन्धुस्मरसहजनभो लाभगश्च प्रशस्तः।।३।।
जन्मलग्न से ६,११,३,१० स्थानों में चन्द्रमा शुभफल देता है।
भौम से २,३,५,६,९,१०,११ स्थानों में, अपने स्थान से १,३,६,७,१०,११
स्थानों में, सूर्य से ३,६,७,८,१०,११ स्थानों में; शनि से ३,११,५,६ स्थानों