बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
DevanagariHindipublished800 पृष्ठ
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३२० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् अथ बुधाष्टकवर्गः— ज्ञः शुक्रात्स्वाद्यलाभाष्टमनवमसुखेसत्रिपुत्रेकुजार्क्याः। साङ्गादारेऽथ जीवाद्द्वयरिपुनिधनायेषुशस्तो दिनेशात्।। धीधर्मान्त्यारिलाभे त्रितनुदशयुते स्वात्सषडाप्तिरन्ध्रे। व्योमाम्बुधिरिन्दुतोऽरिस्वमृतितनुव्योम लाभाब्धिलग्नात् ।।५।। बुध शुक्र से २,१,११,८,९,४,३,५ स्थानों में शुभफल देता है। शनि से १,२,३,४,५,६,७,८,९,१०,११ स्थानों में, गुरु से १२,६,८,११ स्थानों में, सूर्य से ५,९,१२,६,११ स्थानों में, अपने स्थान से ५,९,१२,६,३,१,१० स्थानों में, चन्द्रमा से २,४,६,८,१०,११ और लग्न से ६,२,८,१,१०,११,४ स्थानों में शुभफल देता है।।५।। अथ बुधाष्टकवर्गचक्रम्-
| बु. | बृ. | शु. | श. | सू. | चं. | मं. | ल. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १ | ६ | १ | १ | ५ | २ | १ | १ |
| ३ | ८ | २ | २ | ६ | ४ | २ | २ |
| ५ | ११ | ३ | ४ | ९ | ६ | ४ | ४ |
| ६ | १२ | ४ | ७ | ११ | ८ | ७ | ६ |
| ९ | ५ | ८ | १२ | १० | ८ | ८ | |
| १० | ८ | ९ | ११ | ९ | १० | ||
| ११ | ९ | १० | १० | ११ | |||
| १२ | ११ | ११ | ११ | ||||
| अथ गुर्वष्टकवर्गः— | |||||||
| जीवो भौमात्स्वकेन्द्रागममृतिषु रखेः सधीधर्मेष्वथ स्वात्। | |||||||
| स्वत्रिष्विन्दुजात्षट्स्वसुखसुततनुव्योमधर्मार्गमेषु ।। | |||||||
| लग्नात्सास्तेषु चन्द्रात्स्मरगुरुधनधीप्राप्तिभेष्वर्कपुत्रात्। | |||||||
| धीषट्त्र्यन्तेषु शुक्रात्स्वसुतशुभमतोलाभविद्वेषिभेषु ।।६।। | |||||||
| गुरु भौम से २,१,४,७,१०,११,८ स्थानों में शुभफल देता है, सूर्य से | |||||||
| १,२,४,५,८,९,१०,११ स्थानों में, बुध से ६,२,४,५,१,१०,९,११ स्थानों | |||||||
| में, लग्न से १,२,३,४,५,६,७,९,१०,११ स्थानों में, चन्द्रमा से ७,९,२,५,११ | |||||||
| स्थानों में, शनि से ५,६,३,१२ स्थानों में, शुक्र से २,५,९,११,६ स्थानों | |||||||
| में शुभफल देता है।।६।। |