बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथाष्टवर्गाध्यायः ३२५ त्रिकोणशोधनम्— त्रिकोणं तु चतुःप्रोक्तं मेषसिंहधनुस्तथा। वृषकन्यामृगाख्येषु तुलाकुम्भयुगेषु च॥१९॥ सम्पूर्ण राशिचक्र (१२ राशि) में चार (४) त्रिकोण हैं। त्रिकोण का अर्थ है— प्रथम, पंचम और नवम राशि। प्रत्येक त्रिकोण की प्रथम राशि क्रम से मेष, वृष, मिथुन और कर्क हैं। इसके अनुसार मेष, सिंह, धन प्रथम त्रिकोण; वृष, कन्या, मकर दूसरा; मिथुन, तुला, कुम्भ तीसरा और कर्क, वृश्चिक, मीन चौथा त्रिकोण है॥१९॥ कर्कवृश्चिकमीनास्ते त्रिकोणाः स्युः परस्परम्। त्रिकोणेषु च यन्न्यूनं तत्तुल्यं त्रिषु शोधयेत्॥२०॥ प्रत्येक त्रिकोण की तीनों राशियों में जिस राशि की रेखा संख्या कम हो उसे त्रिकोण की अन्य दो राशि के रेखा की संख्या में घटावे। शेष उसी राशि के नीचे रख दे॥२०॥ एकस्मिन्भवने शून्यं तत्त्रिकोणं न शोधयेत्।